प्रदेश की मेट्रो परियोजना पर ग्रहण लग गया है। अब जनता को इसका इंतजार लंबे समय तक करना पड़ेगा। सारे कामों को ठप कर दिया गया है। लोगों के मेट्रो के सफर का सपना दूर होता जा रहा है।
शहर में प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट की गाड़ी फिलहाल अटक गई है। केंद्र सरकार की ओर से दोबारा डीपीआर बनाने और कई शर्तें लगाने से कानपुर मेट्रो का सफर और लंबा हो गया है।
कानपुर मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को अमर उजाला की टीम पॉलिटेक्निक में जारी मेट्रो यार्ड और बाउंड्री वॉल के निर्माण और गुरुदेव स्थित वस्त्र भवन में बने मेट्रो के ऑफिस पहुंची। दोनों ही जगह सन्नाटा पसरा मिला। पॉलीटेक्निक में मौजूद एक श्रमिक ने बताया कि बीते 15 दिनों से यहां कोई काम नहीं हुआ है। बाउंड्री वॉल और यार्ड दोनों का ही निर्माण ठप पड़ा है। वस्त्र भवन स्थित मेट्रो ऑफिस में मौजूद एक कर्मी के मुताबिक बीते चार माह से इस ऑफिस में कोई अधिकारी नहीं आया है। ऑफिस में फिलहाल मेट्रो से संबंधित कोई काम नहीं हुआ है।
कानपुर मेट्रो
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यह शहर में मेट्रो प्रोजेक्ट के अटकने का स्पष्ट संदेश है। अब शहर में मेट्रो प्रोजेक्ट की अटकी गाड़ी नई डीपीआर बनने के बाद ही पटरी पर आ सकती है। हालांकि इसमें भी जरूरत साबित होने, निवेशक मिलने और 18 फीसदी लाभ तय होने की अनिवार्यता शामिल होगी। केडीए वीसी ने मेट्रो नीति के संबंध में निर्देश आने के बाद शहर में नये सिरे से डीपीआर बनाने की बात कही है। अब शहर में मेट्रो की अटकी गाड़ी यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन के जरिए ही आगे बढ़ेगी। इस पूरी कवायद के बीच शहरवासियों के मेट्रो के सफर का सपना दूर होता जा रहा है। मालूम हो कि कानपुर मेट्रो के लिए अभी तक सिर्फ 50 करोड़ रुपये ही जारी हुए हैं।