शिवली (कानपुर देहात)। भुजपुरा गांव के पास रिंद नदी किनारे लगे सौ साल से अधिक पुराने वृक्ष को कृषि वैज्ञानिकों ने पारिजात यानी कल्प वृक्ष बताया है। हालांकि इसकी पुष्टि वन विभाग करेगा। इसके बाद इसे धरोहर वृक्ष के लिए चिह्नित करने की कार्रवाई होगी।
महाभारत में कल्प वृक्ष यानी पारिजात वृक्ष का जिक्र है। मान्यता है कि यह वृक्ष मनवांछित फलदायी है। इसमें औषधीय गुण भी होते हैं। शिवली क्षेत्र के भुजपुरा गांव में रिंद नदी के नजदीक मैथा-रनियां मार्ग किनारे कल्प वृक्ष जैसा प्राचीन वृक्ष लगा है। आसपास के गांवों में रहने वाले अंकित दुबे, पंकज यादव, सुरेंद्र सिंह, प्रदीप बाजपेई, अजीत पाल ने बताया कि यह वृक्ष सौ वर्ष से अधिक पुराना है।
हम लोग इसे पारिजात यानी कल्प वृक्ष मानकर ही पूजा करते आ रहे हैं। बताया कि पूर्व सीडीओ जोगिंदर सिंह ने मैथा के बीडीओ को वृक्ष के रखरखाव के निर्देश दिए थे। सीडीओ के तबादले के बाद इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
दिलीप नगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार व डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि वृक्ष की पत्तियों आदि के जरिए पहचान कल्प वृक्ष के तौर पर की गई। सीएसए के कृषि वानिकी विभाग के वैज्ञानिकों व वन विभाग के अफसरों के जरिए भी इसकी पुष्टि कराई जाएगी।
पुष्टि होने पर धरोहर वृक्ष में शामिल होगा
भुजपुरा में कल्प वृक्ष लगा होने की जानकारी मिली है। इसकी पुष्टि कराई जाएगी। इसके बाद इसे धरोहर वृक्ष में शामिल कराने के लिए नाम भेजा जाएगा। फिलहाल जिले में नंदपुर, डेरापुर व मैजू समस्तपुर न्योराज व तिश्ती के रिवरी तालाब किनारे लगे पुराने पीपल के पेड़ों को धरोहर वृक्ष के तौर पर शामिल किया गया है। -एके द्विवेदी, डीएफओ कानपुर देहात
जल्द वन विभाग को लिखेंगे पत्र
बाराबंकी में लगे कल्प वृक्ष के फोटो व पत्तियों के मिलान के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने भुजपुरा में लगे प्राचीन वृक्ष को पारिजात बताया है। हालांकि इसकी पुष्टि कराने के लिए अब वन विभाग को पत्र लिखा जाएगा।
-डॉ. अरविंद कुमार, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र