उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में पान की सबसे उत्तम किस्म की पैदावार होती है। इसलिए इसकी मार्केट डिमांड भी अच्छी खासी है। देश विदेश में भी महोबा के पान लबों की शान बनता है। यह है 'देशावरी पान'।
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जिले के किसान ने इस बार देशावरी पान की 72 एकड़ फसल उगाई थी लेकिन आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि कभी जिले में 600 एकड़ देशवारी पान की पैदावार होती थी। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर फसल की पैदावार में इतनी गिरावट कैसे आ गई...?
विदेशों में निर्यात किया जाता है यह पान
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दरअसल इसका बड़ा कारण है कोहरा और कड़ाके की ठंड। पिछले एक सप्ताह से कड़ाके की ठंड और कोहरे के चलते 25 एकड़ देशावरी पान की फसल बर्बाद हो गई है। इसी समय पान लताओं से सबसे पुराने पत्ते तोड़े जाते है। जिन्हें पेड़ी का पान कहा जाता है। बेहद कड़क एंव करारे पन के कारण यह पान बहुत पंसद किया जाता है। इसी पान को विदेशों में निर्यात किया जाता है।
अब तक 10 लाख रुपये की फसल की क्षति
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लेकिन पाले से लगभग 10 लाख रुपये की फसल की क्षति हुई है। इससे करीब पांच सैकड़ा किसान प्रभावित हुए है। कोहरे से किसानों को भारी नुकसान होने के कारण उनका परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है।
किसानों का टूटने लगा मनोबल
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ऐसा हर साल होता है। इसलिए फसल की पैदावार में गिरावट लगातार जारी है। किसानों का मनोबल टूटने से पिछले चार दशकों मेें फसल सैंकड़ा नहीं छू सकी है। बताया जा रहा है कि करीब 30 फीसदी फसल कोहरे की चपेट में है।
औषधीय एवं गुणकारी है यह पान
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इस पान की सबसे बड़ी खासियत इसक औषधी गुण हैं। इसलिए लोग बड़े चाव से पान का सेवन करते हैं। किसानों को पान फसल की अच्छी उम्मीद थी। लेकिन कोहरे ने उनकी उम्मीदों को ठंडा कर दिया है। जबरदस्त ठंड और कोहरा पड़ने से पान फसल चौपट होती जा रही है। इसलिए अब देशावरी पान का मजा लोगों को मुश्किल से मिलेगा।
पान में कीड़ा लगने के कारण पान मुरझाकर गिरने लगे पत्ते
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पान किसानों को इसकी अच्छी कीमत मिलती है। लेकिन इस साल कोहरे के चलते पान किसानों अच्छी फसल देखकर पान किसान खासे उत्साहित थे। लेकिन पाले ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। पान की लताओं के पत्ते खुद ही टूटकर गिर रहे है। कोहरे और शीतलहर चलने से पान में कीड़ा लगने के कारण पान मुरझाकर गिरने लगे है। पान कृषक जगदीश चौरसिया, लालता चौरसिया व बती चौरसिया का कहना है कि कोहरे और बर्फीली हवाओं के कारण पान फसल खराब होने लगी है।
घाटा होने से छोड़ा पान का कारोबार
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घाटा होने से छोड़ा पान का कारोबार
हर साल सर्दी के मौसम में अधिक ठंड पड़ने और कोहरा के कारण पान की फसल बर्बाद होने से तमाम पान कृषकों को हर साल घाटा लगने के कारण अधिकांश पान किसानों ने पान की खेती से नाता तोड़ लिया। पान बरेजों में अधिक खर्च आने और कुदरत के कहर से पान फसल बर्बाद होने के कारण लोग पान की खेती से मुंह मोड़ते जा रहे है।
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600 से घटकर 72 एकड़ पर सिमटी खेती
देश विदेश में मशहूर महोबा का पान लबो की शान प्रकृति के प्रकोप से खत्म होने की कगार पर पहुंचता जा रहा है। किसी समय जनपद व आसपास के क्ष्ेत्र में 600 एकड़ जमीन में पान की खेती होती थी। जो धीरे धीरे घटकर 72 एकड़ भूमि पर ही सिमट कर रह गई है। इससे पान का कारोबार भी खासा प्रभावित हुआ है। अब मांग के अनुरूप ही यहां से पान का निर्यात नहीं कर पा रहे है।