कानपुर में पौने दो साल पहले प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान अस्थायी रूप से टैप किए गए पांच नाले अब सीधे गंगा में गिर रहे हैं। इन नालों का पानी बायोरेमेडिएशन विधि से शोधित करने की योजना भी ठंडे बस्ते में है। वहीं, मुख्यमंत्री ने गुरुवार को डीएवी खेल मैदान में दावा किया कि सीसामऊ नाला टैप कर दिया गया है, अब यहां एक बूंद गंदा पानी गंगा में नहीं गिर रहा है।
अमर उजाला के पड़ताल करने पर पता चला कि परमिया नाला (रामेश्वर नाला), रानी घाट नाला, गोला घाट नाला, सत्तीचौरा नाला, डबका नाला का गंदा पानी खुलेआम गंगा में जा रहा है। वहां से वीआईपी रोड तक बिछाए गए ज्यादातर पाइप भी गायब हो गए हैं। ठेकेदार का करीब सवा दो करोड़ रुपये भुुगतान न होने पर ठेकेदार पंपिंग सेट तक उखाड़ ले गया।
शासन में अटकी नाले स्थायी रूप से टैप करने की फाइल
एक साल पहले जल निगम के मुख्य अभियंता एके सिंह ने इन पांचों नालों को स्थायी रूप से टैप करने के लिए शासन को करीब 46 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था। रुपये स्वीकृत नहीं हुए। उधर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों का कहना है कि योजना स्वीकृत होते ही नाले टैप कर दिए जाएंगे।
परमिया नाले और डबका नाले का पानी सीधे गंगा में जाने पर जल निगम पर जुर्माना भी लगाया गया था। अन्य नाले गंगा में गिरने की जांच कराई जाएगी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को नालों को टैप करने या बायोरेमेडिएशन विधि से पानी शोधित करने के लिए कहा जाएगा।
अनिल माथुर, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड