हसवा। खुद की सुविधा के लिए बनाई गई पुलिया और बिछाए गए रेलवे ट्रैक को जीएमआर कंपनी ने आखिरकार तोड़ दिया। इसी के साथ करीब 10 हजार बीघे खेत में भरा पानी भी निकलने लगा। उधर, समस्या के निस्तारण को लेकर दूसरे दिन भी किसान मौके पर डटे रहे। उधर, सपा नेता मौके पर पहुंचे कर किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग उठाई।
एकारी गांव में जीएमआर कंपनी ने अपना कार्यालय बना रखा है। दिल्ली-हावड़ा रूट पर कंपनी रेलवे ट्रैक चौड़ीकरण का काम कर रही है। भारी मशीनों और बड़े सामानों को लाने ले जाने के लिए कंपनी ने करीब पांच साल पहले कार्यालय से करीब 500 मीटर दूर गंदा नाला पुलिया बनाई थी।
इसी पुलिया पर कंपनी ने सामान ढोने के लिए निजी ट्रैक बिछाया था। इसी गंदे नाले से फतेहपुर शहर, एकारी और इससे जुड़े करीब दो दर्जन गांवों का पानी निकलता है। इधर, लगातार बारिश होने के कारण पुलिया जाम होने से जलनिकासी बाधित हो गई। पानी एकारी के आसपास गांवों के खेतों में भरने लगा। सोमवार को करीब 10 हजार बीघे फसल इससे प्रभावित हुई। नाराज ग्रामीणों ने जब कंपनी के कार्यालय में हंगामा और तोड़फोड़ की तो अधिकारी हरकत में आए।
सोमवार देर रात जीएम के आदेश पर करीब 25 मीटर रेलवे ट्रैक को काटकर हटाया गया और फिर जेसीबी व पोकलैंड से पुलिया को तोड़ दिया गया। मंगलवार को नाले पर फैले पुलिया के मलवे को हटाने का काम होता रहा। मलवा हटने के बाद पानी तेजी से निकलना शुरू हो गया।
इस दौरान सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव, पूर्व चेयरमैन चंद्र प्रकाश लोधी, वर्तमान जिला पंचायत सदस्य भुनेश्वर मौके पर पहुंचे। ग्राम प्रधान एकारी, अतरहा, मुगलचक भी मौके पर रहकर काम कराते रहे। सपा नेता व पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने कहा कि किसानों का भारी नुकसान हुआ है। इसका मुआवजा जीएमआर कंपनी को देना होगा, चाहे इसके लिए धरने पर क्यों न बैठना पड़े। मुगलचक, एकारी, फैजुल्लापुर, बीबीहाट, मुरादीपुर, बुधइयापुर आदि गांवों से पानी निकल रहा है। हालांकि इसकी गति अभी धीमी है।
उधर, कंपनी के जेई उत्तम कुमार ने बताया कि इस समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा। पानी निकलने के बाद इसी जगह पर नया पुल का निर्माण होगा। इस फैसले के बाद ग्रामीणों में खुशी है कि भविष्य में यह समस्या नहीं आएगी। ग्रामीणों ने कंपनी के जीएम एके बाजपेई से मुुलाकात की और उन्हें पुल निर्माण कराने के लिए आभार व्यक्त किया।