फतेहपुर: पैतृक गांव पहुंचा राजेश कुमार का पार्थिव शरीर
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लद्दाख में देश की सीमा की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले शहीद राजेश कुमार का शव रविवार सुबह पैतृक गांव अमौली ब्लाक के खदरा पहुंचा। सपूत के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने भी सारी तैयारियां कर रखी थीं।
सैकड़ों युवाओं ने सैनिक के सम्मान में शव यात्रा के साथ बाइक रैली निकाली। ‘राजेश कुमार अमर रहें’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से पूरा माहौल देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। शहीद के पार्थिव शरीर को मासूम बेटों ने कारगिल शहीद स्मारक के ठीक बगल में मुखाग्नि दी।
जिले के लाल राजेश कुमार प्रयागराज में परिवार के साथ रहते थे। उनकी इन दिनों लद्दाख में तैनाती थी। जवान की शुक्रवार को अचानक सीमा की सुरक्षा करते समय सांसें थम गईं। करीब 48 घंटे बाद शनिवार रात लद्दाख से हवलदार रतन शर्मा लखनऊ हवाई अड्डे पर जवान का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे।
लखनऊ आर्मी बेस से रविवार सुबह 5:50 पर सलामी दी गई। नायब सूबेदार संतोष कुमार, नरपत सिंह, ताराचंद, बलराम सिंह, ब्रज किशोर जवान का शव सवा छह बजे एंबुलेंस से लेकर निकले। करीब 10:30 बजे खदरा गांव जवान का शव पहुंचा।
अमौली उपकेंद्र के पास शव के इंतजार में खड़े बाइक सवार युवाओं ने जवान के सम्मान में नारेबाजी शुरू की और पीछे-पीछे गांव तक पहुंचे। कानपुर नौ सिखलाई यूनिट के जवान पहुंचे। उन्होंने आवास पर ही सलामी दी। जवान के आवास पर उनकी यूनिट के कर्नल शाहिद अहमद, हेड क्वार्टर से लेफ्टिनेंट कर्नल नितिन चौहान, संजीव रामपाल भी पहुंचे और दुख की घड़ी में परिवार को सांत्वना प्रदान की।
केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, कारागार राज्यमंत्री जय कुमार जैकी, डीएम अपूर्वा दुबे, एसपी राजेश कुमार सिंह समेत प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। दोपहर करीब एक बजे गांव से एक किमी दूर झाउपुर स्थित कारगिल शहीद विजयपाल स्मारक के पास शव यात्रा पहुंची।
जहां बेटे राज और गौरव के हाथ पकड़कर छोटे भाई दिनेश कुमार ने बड़े भाई राजेश को मुखाग्नि दिलाई। उस समय पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। डीएम ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर जवान की पत्नी अंजलि को 35 लाख रुपये का चेक सौंपा। वहीं, मां कमला देवी को 15 लाख का चेक सौंपा। अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।