डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. शिवप्रकाश, डॉ. योगेंद्र सिंह ने बंदी के शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान सीएमओ भी पोस्टमार्टम में डटे रहे। गोली लगने पर अधिक रक्त बहने के कारण शिवम की मौत हुई मानी गई है।
फर्रुखाबाद में जिला जेल के बंदी शिवम की गोली लगने पर अधिक रक्त बहने के कारण मौत हुुई है। सीएमओ की मौजूदगी में तीन डॉक्टरों के पैनल से देर रात वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम कराया गया। बंदी के शव की कोख से बुलेट बरामद की गई।
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रविवार को राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव जैनापुर निवासी बंदी शिवम पेट फटने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसको लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से सैफई रेफर कर दिया गया। सैफई पहुंचने पर शिवम को वहां के डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था।
रात को लोहिया अस्पताल में शिवम का डॉक्टर ओपी सिंह ने एक्सरे किया था, जिसमें बुलेट दिखी थी, लेकिन कोई भी अधिकृत जानकारी नहीं दी गई थी। सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के लिए तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया गया।
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रात में 12 बजे डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. शिवप्रकाश, डॉ. योगेंद्र सिंह ने बंदी के शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान सीएमओ भी पोस्टमार्टम में डटे रहे। गोली लगने पर अधिक रक्त बहने के कारण शिवम की मौत हुई मानी गई है। गोली उसके बायीं कोख से पेट को चीरती हुई दायीं कोख में जाकर फंस गई। पोस्टमार्टम में कोख के पास हड्डी में फंसी बुलेट डॉक्टरों ने बरामद कर सील कर दी। बुलेट सहित बंदी शिवम के कपड़े आदि पुलिस के हवाले कर दिए गए।
अफसरों के माथे पर चिंता की लकीरें
बंदी शिवम के एक्सरे कराने से लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में सीओ सिटी प्रदीप सिंह, शहर कोतवाल विनोद कुमार शुक्ला, फतेहगढ़ कोतवाल जय प्रकाश पाल वहां डटे रहे। कई बार सीएमओ व पुलिस अधिकारियों में एकांत में वार्ता भी की गई।
एक्सरे में बुलेट की पुष्टि व पोस्टमार्टम में बुलेट निकलने पर पुलिस अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रहीं थीं। जेल के डिप्टी जेलर अखिलेश मिश्रा भी बंदीरक्षक के साथ वहां पर डटे हुए थे। सीएमओ सहित तीनों डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
एसपी ने किया था दावा, नहीं चली गोली
रविवार को उपद्रव की घटना के समय बंदियों को नियंत्रण करने के दौरान जेल में कई राउंड फायर होने की आवाज बाहर लोगों ने सुनी थी। इसपर एसपी अशोक कुमार मीणा ने जेल में फायरिंग के सवाल को सिरे खारिज करते हुए दावा किया था कि जेल में फायरिंग नहीं हुई है।
आगजनी के दौरान आरओ व बैटरियां आदि फटी थीं, उन्हीं की आवाज बाहर आई और गोली चलने की आवाज समझ बैठे। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर गोली किसने चलाई ? जो तमंचा जिला जेल की बाउंड्रीवाल के पास पड़ा मिला है, क्या उससे भी जेल के अंदर फायरिंग की गई और बाद में उसे बाहर फेंक दिया गया। यह पुलिस की जांच का विषय है।