दस मिनट से ज्यादा बात करने वाले अधिकारी भी शामिल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सीडीआर में कुछ ऐसे अधिकारी भी चिह्नित हैं, जिनसे दस मिनट से ज्यादा देर तक बातचीत हुई है। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि अब तक की जांच में अधिकारियों के नाम भले ही सामने आए हो मगर कहीं से भी यह प्रमाण नहीं मिल पा रहा है कि उन्होंने ठग की आर्थिक या फिर सामाजिक लाभ लेने के लिए मदद की हो।
गनर देने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच विकल्प
ज्वाइंट सीपी अपराध और मुख्यालय नीलाब्जा चौधरी ने बताया कि गनर किसने क्यों और किन परिस्थितियों में दिए यह जांच का विषय है। इसमें भी क्रिमिनल ऑफेंस से ज्यादा विभागीय जांच के तहत कार्रवाई तय की जा सकती है। उन्होंने कहा इसके बावजूद इस मामले में हर एक बिंदु पर गहनता से जांच की जा रही है। किसी की भूमिका संदिग्ध निकलती है, तो खिलाफ कार्रवाई तय है।
शासन ने पुलिस कमिश्नर से मांगी शातिर की कुंडली
प्रमुख सचिव गृह ने पुलिस कमिश्नर से शातिर ठग संतोष की अब तक की हुई जांच की आख्या मांगी है। इसमें पूछा गया है कि ठग को किसने गनर मुहैया कराया? किन-किन अफसरों का उसके घर आना-जाना था, उनकी तैनाती कहां है? किन अफसरों के संपर्क में था? कानपुर में कब से रह रहा है? किराया कितना था?
रिपोर्ट जल्द ही प्रमुख सचिव के ध्यानार्थ अपलोड होगी
क्या मकान मालिक ने उसका सत्यापन कराया था? बिल्डर ने मुकदमा क्यों और कब लिखवाया? अब तक पुलिस ने क्या-क्या कार्रवाई की? कितने लोगों का बयान हुआ? उनका ठग से कैसे संबंध थे? शासन ने यह रिपोर्ट आईजीआरएस के जरिये प्रमुख सचिव गृह तक पहुंची शिकायत के बाद मांगी है। पूरी रिपोर्ट जल्द ही प्रमुख सचिव के ध्यानार्थ अपलोड की जाएगी।