कोरोना से पहले उन्होंने नार्मल पुश बटन वाली मशीन तैयार की थी, लेकिन कोरोना आने की वजह से इसे टाल दिया गया था। साफ-सफाई को देखते हुए मशीन में बदलाव करने के लिए उन्होंने 2021 में अपने आइडिया को आईआईटी कानपुर से इंक्यूबेट किया।
दुनिया के किसी भी कोने से कर सकेंगे ऑपरेट
हरीश कहते हैं कि आईआईटी कानपुर ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड सर्वर की मदद से इस मशीन को तैयार किया गया है। कोई भी वेंडर इस मशीन को लेकर इसका एप डाउनलोड करने के बाद दुनिया के किसी भी कोने से इसे ऑपरेट कर सकता है। मोबाइल से मशीन को ऑन-ऑफ, सफाई के अलावा पानी के कूलिंग की सेटिंग भी की जा सकती है।
सेंसर की मदद से गोलगप्पे में पानी भर जाता है। हरीश ने बताया कि कंपनी पेस्ट देती है जिससे पानी तैयार हो जाता है। गोलगप्पे में कितने एमएल पानी जाना है, इसकी सेटिंग भी मोबाइल से हो जाती है।
बना रहे मटर, आलू भरने वाली मशीन
हरीश ने बताया कि एक और ऑटोमैटिक मशीन तैयार कर रहे हैं जिसकी मदद से मटर और आलू को बिना हाथ लगाए गोलगप्पे में भरा जा सकेगा। मशीन छह महीने में तैयार हो जाएगी। उन्होंने कहा अभी पोर्टेबल मशीन तीन हजार, आठ चटनी वाली मशीन 16 से 20 हजार रुपये की है। उन्होंने कहा कि गोलगप्पे के अलावा भेलपूरी को तैयार करने वाली ऑटोमैटिक मशीन पर काम किया जा रहा है।