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जेल में कट गए आठ साल तब मिली तीन साल की सजा

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कानपुर देहात। घाटमपुर के सतरौली गांव में आठ साल पहले नाबालिग की संदिग्ध मौत के मामले में पिता को कोर्ट ने साक्ष्य छिपाने के आरोप में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। हत्या के आरोप में वह दोषमुक्त साबित हुआ है। सजा सुनाए जाने पर बंदी ने राहत की सांस ली। वह आठ साल से जेल में है। सजा की अवधि से पांच साल अधिक वह जेल में काट चुका है। इससे उसकी रिहाई का रास्ता अब साफ हो गया है।
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घाटमपुर के सतरौली गांव में तीन मई 2013 को एक किशोरी की मौत हो गई थी। उसके पिता ने पुलिस को बिना सूचना दिए नदी में शव प्रवाहित कर दिया था। ग्रामीणों ने संदिग्ध मौत की चर्चा की तो गांव के चौकीदार शिवकुमार ने किशोरी के पिता चंद्रशेखर पर हत्या करने व साक्ष्य छिपाने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शव नदी से बरामद कर पोस्टमार्टम कराया था।
10 मई को 2013 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इसके बाद से वह जेल में है। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय 14 वां वित्त आयोग निजेंद्र कुमार की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान किशोरी की मौत कालरा से होने की बात सामने आई। वहीं इसी के कारण इसकी सूचना पुलिस को दिए बिना शव को नदी में प्रवाह करने की बात कही गई।
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सुनवाई के बाद कोर्ट ने पिता को साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया। इस दौरान 11 गवाहों ने कोर्ट में बयान दिए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी का प्रथम अपराध बताते हुए बच्चों की देखभाल की दुहाई देकर सजा कम देने का अनुरोध किया। वहीं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार पांडेय द्वितीय ने इसका विरोध किया। उन्होंने साक्ष्य छिपाने को गंभीर बताते हुए कड़ी सजा की मांग की।
कोर्ट ने अभियुक्त को हत्या के आरोप में साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया जबकि साक्ष्य छिपाने में तीन साल के कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि साक्ष्य छिपाने में अभियुक्त को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई है।
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