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बुखार पीड़ित बच्चे को चढ़ाया एक्सपायर ग्लूकोज, हंगामा

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कानपुर देहात। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड मेें गुरुवार को बुखार पीड़ित बालक को एक्सपायर ग्लूकोज चढ़ाया जाने लगा। आधी बोतल ग्लूकोज चढ़ने के बाद पिता को एक्सपायर डेट दिखी तो हंगामा शुरू किया। सीएमओ ने मौके पर जाकर छानबीन की। वहीं डीएम के निर्देश पर गठित हुई दो सदस्यीय जांच टीम ने स्टाफ नर्स, इमरजेंसी स्टोर इंचार्ज व मुख्य स्टोर इंचार्ज को दोषी पाया है। डीएम ने तीनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
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रूरा के वार्ड नंबर एक सुभाषनगर निवासी अश्वनी पांडेय ने नौ वर्षीय पुत्र कुशाग्र पांडेय को बुखार आने पर गुरुवार सुबह इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। यहां नर्सिंग स्टाफ ने बालक को ग्लूकोज की बोतल लगा दी। आधा ग्लूकोज चढ़ने के बाद अश्वनी पांडेय की नजर बोतल पर गई तो वह मई 2021 में एक्सपायर मिली। इस पर उसने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
मामले को दबाने के लिए आनन-फानन में एक्सपायर ग्लूकोज को हटाकर नई बोतल लगा दी गई। वहीं इसकी जानकारी सीएमएस डॉ. राजीव गुप्ता को हुई तो उन्होंने मौके पर जाकर एक्सपायर ग्लूकोज की बोतल को डस्टबिन से निकलवाया।
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स्टाफ नर्स कंचन ने सुबह आठ बजे से पहले के नर्सिंग स्टाफ की ओर से ग्लूकोज चढ़ाने की जानकारी दी। वहीं डीएम ने सीएमओ डॉ. एके सिंह को भी मौके पर भेजा। जिस पर बालक को एक्सपायर ग्लूकोज चढ़ाने की पुष्टि हुई।
विस्तृत जांच के लिए गठित अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामशिरोमणि व एसीएमओ डॉ. वीपी सिंह की टीम शाम को अस्पताल पहुंची। जिसमें स्टाफ नर्स शशी चौधरी, इमरजेंसी स्टोर इंचार्ज उपचारिका कंचन देवी व ग्लूकोज बोतलों में गड़बड़ी करने पर मुख्य स्टोर इंचार्ज इंद्रपाल भाटिया को दोषी पाया गया। जांच टीम ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी है।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती बच्चे को एक्सपायर ग्लूकोज चढ़ाने की जांच अतिरिक्त मजिस्ट्रेट व एसीएमओ से कराई गई है। जिसमें इमरजेंसी की उपचारिका, इमरजेंसी स्टोर इंचार्ज उपचारिका व मुख्य स्टोर इंचार्ज को दोषी पाया गया है। तीनों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश सीएमएस को दिए गए हैं। -जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी
इमरजेंसी के स्टोर रूम मेें मिलीं 15 एक्सपायर बोतलें
सीएमएस डॉ. राजीव गुप्ता ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज अली मिर्जा, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमर चंद्रा व लिपिक राहुल अग्निहोत्री की देखरेख में स्टोर रूम की छानबीन कराई। इस पर कपड़े में लपेटकर अलमारी में रखी गईं ग्लूकोज की एक्सपायर हो चुकी 15 बोतलें मिली। जिन्हें बाद में सील करा दिया गया।
गड़बड़ी की असली वजह रहे मुख्य स्टोर इंचार्ज
मामले में सबसे अधिक दोषी मुख्य स्टोर इंचार्ज आईपी भाटिया को पाया गया। जांच के दौरान दो सदस्यीय टीम ने पाया कि पांच प्रतिशत डेस्ट्रोज की 145 बोतलों को मेडिकल कॉरपोरेशन से आई 1992 बोतलों के साथ जोड़ दिया गया। इस तरह ग्लूकोज की कुल 2137 बोतलें हो गई। जिसका एक जुलाई को स्टोर का चार्ज लेने के बाद इंचार्ज आईपी भाटिया ने स्टाक बुक मेें कोई जिक्र नहीं किया। बाद मेें यह बोतलें इमरजेंसी के वार्ड में भेज दी गई और एक बुखार पीड़ित बालक को चढ़ा दी गई।
एक्सपायर ग्लूकोज चढ़ाने पर हो सकती मौत
सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि एक्सपायर होने के बाद आमतौर पर दवाओं व ग्लूकोज की बोतलों को नष्ट करने के लिए भेज दिया जाता है। ग्लूकोज की एक्सपायर हो चुकी बोतल में अगर फंगस हो गया है तो उसे चढ़ाने पर हार्ट ब्लॉक हो जाता है। जिससे मरीज की मौत हो जाती है।
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