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परेशानी: नींद में धांय-धांय कर मुंह से बंदूक चला रहे गेम के लती बच्चे, रिकवरी में आ रही दिक्कत

Wed, 01 Jun 2022 01:31 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कोरोना काल के दौरान लैपटॉप और मोबाइल पर क्लास करते-करते बच्चे मारधाड़ वाले गेम खेलने के लती हो गए। मारधाड़ अब उनके दिमाग में बस गई है। गेम न खेलने देने पर वे उग्र हो जाते हैं और घर का सामान तोड़ने लग रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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धांय-धांय, मर गया, हा-हा-हा..। यह कोई फिल्म का डायलॉग नहीं है। स्वरूपनगर का रहने वाला पब्लिक स्कूल में कक्षा छह का छात्र राजू सोते वक्त यह बड़बड़ाता है। एक-दो दिन नहीं यह रोज का किस्सा है। खाना कम खाता है और पढ़ाई में पिछड़ गया है। गणित के फार्मूले याद नहीं रहते। घर वाले उसे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर के पास ले आए।

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उसकी काउंसिलिंग शुरू की गई है। मोबाइल पर गेम खेलने और इंटरनेट के लती होने के ऐसे तमाम केस हैं। इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी (आईपीएस) ने हालात के मद्देनजर 60 दिन का नुस्खा तैयार किया है। दरअसल, कोरोना काल के दौरान लैपटॉप और मोबाइल पर क्लास करते-करते बच्चे मारधाड़ वाले गेम खेलने के लती हो गए। मारधाड़ अब उनके दिमाग में बस गई है। गेम न खेलने देने पर वे उग्र हो जाते हैं और घर का सामान तोड़ने लग रहे हैं। हर्ष नगर के 12 साल के केशव ने अपना नया टीवी तोड़ डाला है।

वह अपने शरीर में नुकीली चीज से घाव कर लेता है। इन बच्चों की स्कूल से भी शिकायतें आने लगी हैं। इन्हें अश्लील साइटों पर जाने की भी लत लग रही है। सोसाइटी की हेल्पलाइन पर जो फोन आ रहे हैं, उनमें बताया जा रहा है कि बच्चों को हुक्का पीने, शराब पीने, सिगरेट आदि की लत बढ़ गई हैं।

इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बच्चों में इससे डिप्रेशन, एंजाइटी भी हो रही है। इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी ने 60 दिन का कोर्स बनाया है। इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले 20 दिन इंटरनेट देखने में हल्की बंदिश लगाई जाती है और इनाम दिया जाता है। इसी तरह अगले 20 दिन बंदिश के घंटे बढ़ा दिए जाते हैं और इनाम बड़ा कर दिया जाता है। आखिरी 20 दिन बंदिश और बढ़ती है और काउंसलिंग होती है।- डॉ. गणेश शंकर, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

इसलिए लगती लत
इंटरनेट मोबाइल गेम खेलने या दूसरी साइटें लगातार देखने से डोपामीन न्यूरो केमिकल का मस्तिष्क में रिसाव होता है। इसे हैप्पी हारमोन भी कहते हैं। लती होने पर जब तक बच्चा गेम नहीं खेलता, उसका हैप्पी हारमोन नहीं रिसता। इससे वह बार-बार वही हरकत करता है। काउंसिलिंग और दवा से इसे ठीक किया जाता है।

शासन को गाइडलाइन भेजी
सोसाइटी ने बच्चों की स्थिति को लेकर शासन को गाइडलाइन भेजी है। इसमें सलाह दी गई कि स्कूलों में मनोरोग विशेषज्ञ या क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए। सबसे कम अंक पाने वाले 10 बच्चों और उनके परिजनों का काउंसलिंग कराएं। ऑटिज्म, अटेंशन डिफिसिट हाइपर काइनेटिक डिस्ऑर्डर, कमजोर मस्तिष्क वाले बच्चों के उपचार की व्यवस्था की जाए। बच्चों के बर्ताव पर ध्यान रखा जाए। साइकोलॉजिकल टेस्ट कराए जाएं।
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कुछ तथ्य
- एकाकी परिवारों में दिक्कत अधिक
- संयुक्त परिवार टूटने से आ रही दिक्कत
- मां-बाप के आपसी झगड़े से बच्चों में बढ़ता स्ट्रेस
- दादी-नानी के न होने से इमोशनल सपोर्ट नहीं मिल पाता
- बाहर खेलने नहीं जाते, घर में किताबों के बाद मोबाइल व टीवी ही साधन।
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