डॉक्टरों के चैंबरों में लंबी लाइन नहीं लगी। हैलट के वार्डों में दोपहर तक 380 रोगी ही बचे थे। रुटीन ओटी टाल दिए जाने से सर्जरी के रोगी भर्ती नहीं हो रहे हैं। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि रोगियों को कोई दिक्कत न हो, इसकी व्यवस्था बना दी गई है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों (जेआर-1) ने ओपीडी, ओटी के साथ वार्डों में कार्य बहिष्कार कर दिया है। ये नीट पीजी-2001 की काउंसलिंग की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे हैलट इमरजेंसी में रोगियों की संख्या एक तिहाई बची है।
विज्ञापन
इसके साथ ही वार्डों में भर्ती रोगी भी अस्पताल छोड़कर भाग रहे हैं। जेआर-1 की हड़ताल का जेआर-2 और सीनियर रेजीडेंट ने भी समर्थन कर दिया है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की सूचना से हैलट ओपीडी में भी रोगियों की संख्या कम रही।
अस्पताल में कंसल्टेंट और इंटर्न छात्रों के भरोसे व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही नर्सिंग कालेज के पोस्ट बीएससी छात्र-छात्राओं को वार्डों में ड्यूटी पर लगाया गया है। हैलट इमरजेंसी में जेआर-1 की हड़ताल के पहले एक बेड पर दो रोगियों को भर्ती किया जा रहा था।
विज्ञापन
अब एक बेड पर एक ही रोगी है। दोपहर को कुछ हड़ताली डॉक्टर इन रोगियों का उपचार करते नजर आए। इमरजेंसी में कोई कंसल्टेंट नहीं दिखा। शुक्रवार को दोपहर तीन बजे तक 119 रोगी हैलट इमरजेंसी में भर्ती हुए थे, लेकिन शनिवार को इसी वक्त तक सिर्फ 61 रोगी भर्ती हुए।
जिन रोगियों की हालत जरा सी सुधर रही है, वे घर भाग जा रहे हैं। हैलट ओपीडी और अस्पतालों में रोगियों की संख्या बहुत कम रही। डॉक्टरों के चैंबरों में लंबी लाइन नहीं लगी। हैलट के वार्डों में दोपहर तक 380 रोगी ही बचे थे। रुटीन ओटी टाल दिए जाने से सर्जरी के रोगी भर्ती नहीं हो रहे हैं। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि रोगियों को कोई दिक्कत न हो, इसकी व्यवस्था बना दी गई है।