कानपुर देहात। जेल में बंद डकैत मंगली केवट ने बंदियों से जान का खतरा बताकर अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक से स्पेशल गार्ड की निगरानी में पेशी पर लाने का अनुरोध किया था।
इस पर कोर्ट ने एसपी को पत्र लिखा था। मामले में एसपी की रिपोर्ट शनिवार को कोर्ट में दाखिल की गई। इसमें मंगली केवट को स्पेशल गार्ड से कोर्ट भेजने की जरूरत न होने की बात कही गई है।
माती जेल में निरुद्ध डकैत मंगली केवट ने 30 नवंबर को कोर्ट के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर खुद की जान का खतरा बता स्पेशल गार्ड की निगरानी में पेशी पर लाने की मांग की थी। उसने 2006 में तत्कालीन डीआईजी कानपुर की तरफ से ऐसा निर्देश किए जाने का उल्लेख प्रार्थना पत्र में किया था।
इस पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट चौदहवां वित्त आयोग निजेंद्र कुमार ने एसपी को पत्र लिखकर आख्या मांगी थी। एसपी ने मामले में आरआई से रिपोर्ट तलब की। आरआई की छानबीन में मंगली को स्पेशल गार्ड से भेजने से संबंधित उच्चाधिकारियों का कोई निर्देश पत्रावली में नहीं मिला।
एसपी ने कोर्ट को आख्या भेजकर बताया कि माती जेल से कोर्ट की दूरी बेहद कम है। इस दूरी के बीच डीएम, एएसपी, सीओ व अन्य अधिकारियों के आवास हैं। वहां पुलिस की 24 घंटे ड्यूटी रहती है। रास्ते में सिविल पुलिस व यातायात पुलिस भी तैनात रहती है।
हवालात सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहता है। साथ ही बंदियों को एक वाहन में पूर्ण सुरक्षा व पर्याप्त पुलिस बल के साथ भेजा जाता है। ऐसे में मंगली केवट को कोई खतरे की संभावना नहीं है।
गैर जनपद में पेशी कराने पर उसे स्पेशल गार्ड के साथ भेजा जाता है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति दाखिल करने का समय मांगा। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार पांडेय द्वितीय ने बताया कि मामले में बहस की तिथि दस दिसबंर तय की गई है।