सीबीआई ने ग्लोबिज एग्जिम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक हीरा कारोबारी सुजॉय देसाई समेत 6 आरोपियों पर 12 करोड़ 68 लाख रुपये के बैंक फ्रॉड की रिपोर्ट दर्ज की है। कंपनी ने खूब फर्जीवाड़ा किया।
दरअसल, ग्लोबिज एग्जिम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खातों में फोरेंसिक ऑडिटर को बहुत गड़बड़ियां मिली थीं। एक जैसी कंपनियों के बीच एक जैसे बिल, इनवॉइस, एक की कॉन्ट्रैक्ट नंबर का उपयोग करके खेल किया गया। कॉन्ट्रैक्ट डेट और बिल लैंडिंग डेट में हेर फेर किया गया था।
स्टॉक रिकॉर्ड, आउटवर्ड ट्रेडिंग का कोई दस्तावेज नहीं मिला था। 2014-16 के बीच ग्लोबिज से बिना किसी गारंटी के मोहन स्टील को लोन दिया गया। मोहन स्टील लिमिटेड में फ्रॉस्ट की 2.07 फीसदी और रोटोमैक ग्रुप की 47.05 फीसदी हिस्सेदारी पाई गई।
मोहन स्टील लिमिटेड में उदय देसाई और विक्रम कोठारी दोनों ही डायरेक्टर रहे हैं। मोहन स्टील दोनों ही ग्रुप की एसोसिएट कंपनी पाई गई।
फर्जीवाड़ा कर लोन पर दे दी रकम
फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद बैंक ने 31 मार्च 2018 को ऑडिट कराया। तब कई तथ्य सामने आए। दरअसल ग्लोबिज एग्जिम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने दावा किया था कि वह यूएस से सोया बींस, कनेडियन पीला मटर, ब्राजीलियन शुगर, ब्राजीलियन सोया बींस आदि आयात निर्यात करती है।
मगर ऑडिट में ये दावा फर्जी पाया गया। आरोपियों ने जो लोन लिया उसको अपने परिचितों व रिश्तेदारों को लोन के रूप में दे दिया। लोन देने में भी फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। इस लोन का किसी भी तरह का एग्रीमेंट आदि नहीं मिला। न ही इनको लोन देने का अधिकार था। इन सब तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई है।
सरकारी कर्मचारी की भी मिलीभगत रही
कंपनी के निदेशक, अतिरिक्त निदेशक, गारंटर के अलावा सरकारी कर्मचारी भी मिलीभगत रही। जिसके जरिये फ्रॉड को अंजाम दिया गया। यही वजह है कि एफआईआर में सरल वर्मा, सुजॉय देसाई, अरविंद श्रीवास्तव के अलावा एक अज्ञात सरकारी कर्मचारी व अन्य अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है।
आशंका है कि इसमें नामजद आरोपियों के अलावा भी कई और लोग भी शामिल हैं। सीबीआई की विवेचना में जिनके जिनके खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे उनको आरोपी बनाया जाएगा।