2016 में डीजीक्यूए में क्लर्कों की भर्ती प्रक्रिया हुई थी। आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद 960 लोगों ने परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम आने के पहले ही इन पांचों का नाम उजागर हो गया था। इसके बाद में इनको नौकरी भी मिल गई थी। परीक्षा में शामिल अन्य अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत विभाग में की थी।
2018 में कैट इलाहाबाद से ले आए थे स्टे
आरोप लगाया था कि इनके नंबर बढ़ाकर इन्हें नौकरी दी गई है। जांच के बाद इन सभी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि जनवरी 2018 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) इलाहाबाद से स्टे ले आए थे। यह स्टे 28 जुलाई 2021 तक ही वैध था।
15 मार्च को फिर से बर्खास्त किया गया
इसके बाद भी ये लोग नौकरी करते रहे। मामले का खुलासा होने के बाद 15 मार्च को इन्हें फिर से बर्खास्त किया गया। सभी आरोपियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है। इसके अलावा स्टे लेने से पहले जितने समय नौकरी की, उस दौरान की भी वसूली पर विचार किया जा रहा है।
इनसे होगी वसूली
कैंट निवासी रविकांत पांडेय, केडीए कॉलोनी निवासी आरती गुप्ता, श्यामनगर निवासी प्रतिभा मिश्रा, आरकेनगर निवासी अर्पित सिंह फैजाबाद निवासी उत्कर्ष श्रीवास्तव।