बैंक का लगभग 50 हजार रुपये कर्ज था
शाम को फसल देखकर घर पहुंचा तो काफी व्यथित था। पूछने पर बताया कि नील गायों ने करीब डेढ़ बीघा फसल पूरी तरह से नष्ट कर दी है। बैंक का भी करीब दो लाख 50 हजार रुपये कर्ज है, वहां से भी कई बार नोटिस आ चुके हैं। अब कैसे कर्ज चुकाएगा।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
उसे समझाकर किसी तरह शांत किया था। करीब पौने सात बजे वह बिना बताए घर से निकला और पशुबाड़े में जाकर फंदा लगा गया। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है। अभी आत्महत्या का कारण पता नहीं चला है।
पिता ने भी जहर खाकर की थी आत्महत्या
कुलदीप के पिता ने भी करीब दस वर्ष जहर खाकर जान दी थी। पिता ने ही बैंक से कर्ज लिया था, जिसे अदा करने के लिए बैंक से नोटिस आ रहा था। कुलदीप ने गेहूं की फसल होने पर कुछ रुपये जमा करने की बात कही थी, लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही नष्ट होने के चलते उसने यह कदम उठाया।
कुलदीप के चाचा राजेंद्र सिंह ने बताया कि हम तीन भाई थे। हमारे पिता के पास करीब नौ बीघा जमीन थी। बंटवारे के दौरान तीनों भाइयों के हिस्से में तीन-तीन बीघा जमीन आई थी। कुलदीप के पिता ने करीब 12 वर्ष पहले पैलानी कस्बा की एक बैंक से कर्ज लिया था। कितने रुपये कर्ज लिया था इसकी जानकारी नहीं है।
परिवार पालने के लिए मजदूरी भी करता था
उन्होंने एक बार भी कर्ज जमा नहीं किया था। वर्ष 2013 में उन्होंने भी जहर खाकर जान दे दी थी। उनके परिवार में पत्नी ममता के अलावा तीन बेटे व एक बेटी है। कुलदीप सबसे बड़ा था। पिता की मौत के बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। परिवार का पेट पालने के लिए वह खेती के अलावा मजदूरी भी करता था।
बैंक से लगातार आ रहे थे नोटिस
पिछले कई माह से बैंक से नोटिस आ रहा था। तीन माह पहले भी बैंक से नोटिस आया था। तब कुलदीप ने गेहूं की फसल होने पर कुछ रुपये जमा करने की बात कही थी। कुलदीप बैंक का करीब ढाई लाख रुपये कर्ज होने की बात बता रहा था। लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही नील गाय ने नष्ट कर दी।