एक साथ तीन तलाक देने के मसले पर छिड़ी बहस से सबसे ज्यादा परेशान मुस्लिम महिलाएं और लड़कियां हैं। अखबारों और न्यूज चैनलों पर इन दिनों इस मुद्दे पर छिड़ी बहस को देखकर उनके मन में कहीं न कहीं शंकाएं पैदा हुई हैं। इस वजह से महिलाएं उलेमा को मोबाइल पर अपनी शंकाओं को दूर कर रही हैं और बेहतर हल शरीअत की रोशनी में चाहती हैं।
यह शंकाएं खासकर अविवाहिता और नवविवाहिता महिलाओं में अधिक हैं। रजबी रोड स्थित शरई अदालत दारुल कजा के काजी मुफ्ती इनामउल्ला कासमी और जामे उलूम के उस्ताद मुफ्ती अब्दुर्रशीद कासमी ने कहा कि जो फोन आ रहे हैं, उनसे बताया जाता है कि तलाक अल्लाह की नजर में नापसंदीदा अमल है। यह मजबूरी में दिया जाता है। एक साथ तलाक देना जुर्म है। बेहतर है कि तलाक-ए-एहसन का सहारा लिया जाए।
यानी कि एक बार में एक तलाक फिर तीन महीने का अंतराल। इससे अधिकतर मियां-बीवी के दोबारा एक साथ आने की संभावना बनती है। उलेमा उन्हें यह भी आश्वासन दे रहे हैं कि परेशान न हों। दीन की मालूमात करें और अपने शौहरों को भी इस्लाम में दिए महिलाओं के अधिकारों को जानकारी कराएं। अगर कोई बात हो जाए तो परिवार के बड़े बुजुर्गों में और बाद में पंचायतों के समक्ष मामले को रखें।
जुमे से चलेगी उलेमा काउंसिल की मुहिम आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल जुमे से इस मामले में मुहिम चलाएगी। इसमें एक साथ तीन तलाक देने के खिलाफ अभियान छेड़ा जाएगा। हैंडबिल और किताबें बांटी जाएंगी। मस्जिदों से इमामों की तकरीर कराई जाएगी कि तीन अंतराल में तीन तलाक देने की प्रथा को ही प्रचलित कराएं। महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने बताया कि मुहिम की तैयारी की गई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी पत्र लिखा गया है।