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पुलिस हिरासत में मौत का मामला: खाकी का खेल आया काम, खामोश परिजन, बच गए गुनहगार

Thu, 27 Oct 2022 03:05 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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यूपी पुलिस - फोटो : फाइल फोटो
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कानपुर में पुलिस हिरासत में दलित शख्स की मौत के मामले में पुलिस का खेल काम आया। तहरीर बदलकर उसके भाई पर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया था। लिहाजा परिजन खुद ही दबाव में आकर खामोश हो गए। जो मौत के जिम्मेदार हैं, उनको बचा लिया गया है। उच्चाधिकारियों की रहते आउटर पुलिस ने हिरासत में हुई मौत पर कफन डाल दिया। 
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बिधनू के रमईपुर में 23 अक्तूबर की रात राजेंद्र कठेरिया (47) का अपने भाई बबलू से विवाद हो गया था। सूचना पर पहुंची पुलिस राजेंद्र को हिरासत में लेकर चली गई थी। देर रात तबीयत बिगड़ने पर पुलिस राजेंद्र को लेकर पहले सीएचसी और फिर हैलट पहुंची थी जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया था।

राजेंद्र के परिजनों ने पुलिस पर मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगा पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने तहरीर बदलकर बबलू पर ही हत्या का केस दर्ज कर दिया था। जानकारी के मुताबिक परिजन इसलिए खामोश हो गए हैं क्योंकि राजेंद्र की मौत हो गई और बबलू पर जेल जाने की तलवार लटकने लगी है। इसलिए वह कार्रवाई से पीछे हट रहे हैं। 
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सुबूतों और साक्ष्यों का किया दरकिनार
परिजन सीधे पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाते रहे। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि जब वह बदहवास हालत में थीं तब तहरीर पर पुलिस वालों ने अंगूठा लगाया था। यही नहीं यह भी स्पष्ट था कि पुलिसकर्मी राजेंद्र को उठा लाए थे। यानी राजेंद्र पुलिस हिरासत में थे। तभी उनकी जान गई। हैरानी की बात ये है कि इन सारे तथ्यों, साक्ष्यों को दरकिनार कर अफसरों ने मनमर्जी कार्रवाई की और मामला रफादफा कर दिया। 

हिरासत में लेकर छोड़ा
वारदात के बाद बबलू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। पूछताछ के बाद उसको छोड़ दिया था। चूंकि पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है, इसलिए पुलिस अब केस की विवेचना ठंडे बस्ते में डाल देगी। जिससे आसानी से मामला खत्म कर दिया जाए। 
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