सुबूतों और साक्ष्यों का किया दरकिनार
परिजन सीधे पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाते रहे। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि जब वह बदहवास हालत में थीं तब तहरीर पर पुलिस वालों ने अंगूठा लगाया था। यही नहीं यह भी स्पष्ट था कि पुलिसकर्मी राजेंद्र को उठा लाए थे। यानी राजेंद्र पुलिस हिरासत में थे। तभी उनकी जान गई। हैरानी की बात ये है कि इन सारे तथ्यों, साक्ष्यों को दरकिनार कर अफसरों ने मनमर्जी कार्रवाई की और मामला रफादफा कर दिया।
हिरासत में लेकर छोड़ा
वारदात के बाद बबलू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। पूछताछ के बाद उसको छोड़ दिया था। चूंकि पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है, इसलिए पुलिस अब केस की विवेचना ठंडे बस्ते में डाल देगी। जिससे आसानी से मामला खत्म कर दिया जाए।