उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में डाकू गोप्पा को गुरु एक लाख के ईनामी डाकू गौरी यादव से आगे बढ़ने की चाहत ही उसके लिए घातक साबित हो गई। सूत्र बताते हैं डाकू गौरी के इशारे पर ही गोप्पा की गिरफ्तारी हुई है। इसमें गोप्पा के गैंग के एक सदस्य की भी भूमिका बताई जा रही है। एसटीएफ ने रणनीति के तहत गोप्पा को जाल में फंसाकर आसानी से दबोच लिया।
डकैत गोप्पा
कुख्यात डाकू के इतनी आसानी से एसटीएफ और पुलिस के हत्थे चढ़ने की घटना हर किसी को हैरान कर रही थी। हर व्यक्ति उसके जिंदा बचने की उम्मीद नहीं कर रहा था।
बिना फायरिंग पकड़े जाने से पूरी सच्चाई जानने को लोग बेताब थे। खंडेहा, हनुमानगंज, लालता रोड़ से लेकर सरधुआ के खरियारीपुरवा के कुछेक लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 19 जून को जब गोप्पा ने मुख्यालय के बोरिंग कराने गए दो युवकों मिथलेश और संदीप सिंह को पकड़कर फिरौती मांगी तो गौरी ने मध्यस्थता कर दोनों को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन शागिर्द से गुरु बनने की चाह के कारण गोप्पा ने गुरु गौरी को भी भला बुरा कह दिया था।
डेमो
इसके बाद से ही गौरी ने गोप्पा गैंग के सदस्य धोनी उर्फ महेंद्र से मिलकर पूरी कहानी रची और इसका फायदा एसटीएफ को मिला। इस मामले में एसटीएफ के किसी भी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की। सब यही कहते रहे कि गोप्पा भागने की फिराक में था। उसे मुखबिर की सूचना पर बंदूक समेत पकड़ा गया है। गैंग के बाकी सदस्य भागने में सफल रहे।