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Hamirpur: साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा, तीन सदस्यों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

Sat, 22 Oct 2022 04:25 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

सुमेरपुर थाना क्षेत्र में पुलिस और साइबर सेल ने साइबर धोखाधड़ी के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही, गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
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साइबर अटैक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हमीरपुर जिले में थाना सुमेरपुर पुलिस व साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह के तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से 20 हजार रुपये व आठ मोबाइल बरामद किए है। एएसपी ने घटना का खुलासा किया है।

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सुमेरपुर कस्बा निवासी सूरज ने बीते 18 अक्तूबर को थाने में लिखित सूचना देते बताया कि 28 सितंबर को उसके खाते से अज्ञात व्यक्ति द्वारा साइबर ठगी करके  99,750 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
थाना पुलिस ने साइबर सेल टीम के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करते हुए रिमझिम फैक्टरी के पास तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 20 हजार की नगदी सहित आठ मोबाइल बरामद किए है। पकड़े गए आरोपियों में जनपद कानपुर नगर के थाना घाटमपुर के श्रीनगर निवासी मनोज कुमार, मछैला निवासी वरुण कुमार संखवार व लल्लू का पुरवा मजरा दहली निवासी विनय कुमार शामिल है।

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अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने अपराध करने के तरीके के बारे में जानकारी दी। एएसपी ने बताया कि अभियुक्त मनोज कुमार व मुकदमा के वादी सूरज कानपुर में एक ही कमरे में बतौर किराएदार रह रहे थे।

अभियुक्त मनोज कुमार ने सूरज के पेटीएम का आईडी व पासवर्ड चुरा लिया था। उसे जानकारी थी कि उसके खाते में काफी रुपये है। जिस पर उसके मन में लालच आ गया और उसके खाते से रुपये निकालने की फिराक में लग गया। जिस पर उसने अपने साथी विनय, वरुण व रवि संखवार से संपर्क किया।

उनसे साइबर अपराध की ट्रेनिंग लेते हुए निशा निवासी पहाड़पुर जनपद सुल्तानपुर के बैंक का खाता नंबर लेकर उस खाते में अभियुक्त मनोज ने 99,750 रुपये ट्रांसफर कर लिए। इसके उपरांत तीनों अभियुक्त द्वारा जनसेवा केंद्र दरगवां अकबरपुर गए।
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यहां विनय द्वारा निशा के बैंक खाते से 99,750 रुपये मरचेंट वॉलेट के जरिए जनसेवा केंद्र के खाते में स्थानांतरित की। इसमें अभियुक्त वरुण के मोबाइल का प्रयोग किया गया। उपरोक्त अभियुक्तगणों  द्वारा उपरोक्त धनराशि को आपस में बांट लिया गया। इनका एक साइबर अपराध का संगठित गिरोह है।
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