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सीएसए दीक्षांत समारोह: किसानों के सपूतों ने हासिल किए मेडल, कई मेधावियों ने पाए एक से अधिक पदक

Mon, 27 Dec 2021 10:40 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सोमवार को कुलाधिपति राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में 23वां दीक्षांत समारोह हुआ। यहां 61 मेधावियों को 54 पदक दिए गए। कई मेधावियों को पुस्तक पुरस्कार दिए गए।
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सीएसए दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीएसए में दीक्षांत समारोह में कई किसानों के बच्चों ने मेडल पाकर अपने पिता का मान बढ़ाया है। इनमें छात्र छात्राएं ऐसे हैं, जिनके पिता के कई मात्र एक, दो बीघा खेत ही हैं। किसी ने बैंक से लोन लेकर पढ़ाई की तो किसी के पिता ने रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर अपने बच्चों को पढ़ाया।
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बैंक का लोन चुकाने के लिए बनना है काबिल 
पिता किसान हैं और उनके पास केवल दो बीघा खेत हैं। उसी से मेरे परिवार की रोजी रोटी और अन्य खर्चे पूरे होते हैं। मेरी पढ़ाई के लिए पिता ने बैंक से लोन लिया है। अब मुझे उसको चुकाने के लिए काबिल बनना है। यह कहना है सीतापुर के रहने वाले बृजेश कुमार का। उन्होंने बीएसएसी (एजी) में 8.69 ओवरऑल ग्रेड प्वाइंट एवरेज (ओजीपीए) पाकर कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाया है। वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं और आईपीएस बनकर देश सेवा करना चाहते हैं। पिता मुद्रिका प्रसाद किसान और मां मीरा देवी गृहिणी हैं। इनको राय साहब गजोधर लाल मेमोरियल स्वर्ण पदक भी मिला है।

पढ़ाई के लिए रिश्तेदारों से उधार लिया पैसा
ललितपुर के रहने वाले राजीव कुमार ने बीएससी (हॉर्टिकल्चर) कोर्स में 8.37 ओजीपीए पाकर कुलाधिपति स्वर्ण पदक हासिल किया है। उन्होंने बताया कि पिता महेश कुमार किसान हैं। उनके पास तीन बीघा खेती है। मुझे पढ़ाई कराने के लिए उन्होंने रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए हैं। मुझे उनकी इस तपस्या का अच्छा फल देना है। वह भविष्य में पीएचडी करके किसानों के लिए उन्नत तकनीक विकसित करना चाहते हैं।
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साढ़े पांच बीघा है खेत, पाया कुलाधिपति स्वर्ण पदक 
सीएसए के इटावा स्थित प्रौद्योगिकी कॉलेज से बीटेक (सीएस) करने वाले सलिल शुक्ला ने 8.24 सीजीपीए के साथ कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाया है। पिता राजेश कुमार किसान और मां अनीता शुक्ला गृहिणी हैं। नौबस्ता निवासी सलिल ने बताया कि साढ़े पांच बीघा खेती से उनके घर का खर्च चलता है। स्कॉलरशिप के पैसे से उन्होंने पढ़ाई की है। इस वक्त नोएडा की एक आईटी कंपनी में 4.5 लाख के पैकेज पर नौकरी कर रहे हैं। भविष्य में वह स्टार्टअप करना चाहते हैं।

सौरभ ने चार पदक पाकर रचा इतिहास
सीएसए से बीएससी (ऑनर्स) एजी में 8.54 ओजीपीए अंक पाने वाले सौरभ कुमार ने सर्वाधिक चार पदक पाए हैं। इनको विवि रजत, डॉ. कीर्तिकार मेमोरियल गोल्ड, स्व. अक्षयबर सिंह मेमोरियल गोल्ड और आप्सी गोल्ड मेडल मिला है। इनके पिता दुर्गा प्रसाद किसान हैं, उनके पास 20 बीघा खेेती है। यूपी कैटेट की परीक्षा में सातवीं रैंक पाकर यह सीएसए से एमएससी (प्लांट पैथोलॉजी) की पढ़ाई कर रहे हैं।  लखीमपुर निवासी सौरभ भविष्य में पीसीएस अधिकारी बनना चाहते हैं। मां कुसुमा देवी गृहिणी हैं।
 
स्कॉलरशिप की सहायता से पढ़ाई 
पिता गया प्रसाद किसान हैं। उनके पास दो बीघा खेत हैं। मैंने स्कॉलरशिप के पैसों से अपनी पढ़ाई को पूरा किया है। मुझे पीएचडी करके प्रोफेसर बनना है और अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा करना है। ये बातें सीएसए के इटावा स्थित प्रौद्योगिकी कॉलेज से बीटेक (एजी टेक्नोलॉजी) में 8.75 ओजीपीए लाने वाले जितेंद्र कुमार ने कहीं। इनको कुलाधिपति स्वर्ण पदक मिला है। यह मूलरूप से घाटमपुर के साढ़ में रहने वाले हैं।

बीएससी की टॉपर ने एमएससी में भी पाया गोल्ड
सीएसए के कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की छात्रा वर्तिका श्रीवास्तव ने एमएससी (होम साइंस) में 8.55 ओजीपीए पाकर  कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाया है। इनको सरस्वती वर्मा स्वर्ण पदक और पुस्तक पुरस्कार भी मिला है। इन्होंने सीएसए से बीएससी (होम साइंस) की पढ़ाई में भी गोल्ड मेडल पाया था। गीता नगर निवासी वर्तिका इस समय चौधरी चरण सिंह कृषि विवि हिसार से पीएचडी कर रही हैं। आईसीएआर एसआरएफ की परीक्षा में इनकी एआईआर चौथी रैंक थी। वह भविष्य में महिलाओं के लिए स्टार्टअप करना चाहती है। पिता राजेश कुमार श्रीवास्तव व्यापारी और मां सुमन गृहिणी हैं।

एग्री एंटरप्रेन्योर बन देंगी रोजगार
सीएसए से एग्री बिजनेस मैनेजमेंट (एबीएम) करने वाली स्मृति यादव ने 8.87 ओजीपीए पाकर कुलाधिपति स्वर्ण पदक हासिल किया है। पिता अजयवीर सिंह सीएसए के डीएसडब्ल्यू कार्यालय में कार्यरत हैं। बरेली निवासी स्मृति इस समय
इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएआरआई) से पीएचडी के लिए तैयारी कर रही हैं। वह भविष्य में एग्री एंटरप्रेन्योर बनकर किसानों को रोजगार देना चाहती हैं।

यशस्वी को मिले दो स्वर्ण पदक
सीएसए से एमएससी (हॉर्टिकल्चर) की पढ़ाई करने वाली जी नागा यशस्वी को दो गोल्ड मेडल मिले हैं। इनके 8.49 ओजीपीए हैं। इनको कुलाधिपति स्वर्ण, पीएन बाजपेई मेमोरियल स्वर्ण पदक और पुस्तक पुरस्कार मिला है। प्रयागराज निवासी यशस्वी पीएचडी करके शोध क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं। पिता नागेंद्र कुमार पुलिस विभाग में अधिकारी और मां नागालक्ष्मी गृहिणी हैं।

सत्यश्री ने पाए तीन स्वर्ण पदक
एमएससी (कीट विज्ञान) की छात्रा सत्यश्री तेटली ने 8.79 ओजीपीए पाकर तीन स्वर्ण पदक पाए हैं। इनको कुलाधिपति स्वर्ण, डॉ. एमएम अग्रवाल स्वर्ण और देवराजी मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला है। उन्होंने बताया कि वह अपनी कक्षा में अकेली छात्रा थीं। शुुरुआत में डर लगा लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य हो गया। आंध्र प्रदेश के राजमंडी जिले में रहने वाली सत्यश्री सिविल सेवाओं की तैयारी कर रही हैं। पिता नारायणन रेड्डी व्यापारी और मां अन्नपूर्णा गृहिणी हैं।

आईएएस बनकर करना है देश सेवा 
बीएससी (वानिकी) पाठ्यक्रम में 8.01 ओजीपीए पाकर आकाश कुमार गौड़ ने कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाया है। वह भविष्य में आईएएस अधिकारी बनकर देश सेवा करना चाहते हैं। देवरिया निवासी आकाश कंटेंट पर फोकस करके पढ़ाई की है। पिता राजेंद्र गौड़ सरकारी कर्मचारी और मां रीता देवी गृहिणी हैं।

सिविल सेवाओं में कॅरियर बनाएंगे उमंग
सीएसए के इटावा स्थित प्रौद्योगिकी कॉलेज से उमंग तिवारी ने बीटेक (मैकेनिकल) से 7.98 ओजीपीए लाकर कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाया है। कन्नौज निवासी उमंग ने बताया कि रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई कर सफलता पाई है। वह सिविल सेवाओं में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं। पिता विनय कुमार तिवारी जिला उद्यान निरीक्षक और मां मधु तिवारी गृहिणी हैं।
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आईटीबीपी के जवान की बेटी को मिला गोल्ड
बीएससी (होम साइंस) में 8.67 ओजीपीए पाने वाली गुजैनी की रहने वाली आकांक्षा वर्मा ने कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाया है।  पिता भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में हेड कांस्टेबल और मां ओमलता गृहिणी हैं। वह भविष्य में सिविल सेवा परीक्षा पास करके आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। रोज रात में पढ़ाई करने से उनको यह सफलता मिली है।

रोजाना तीन घंटे पढ़ाई कर पाई सफलता 
मैंने कॉलेज के अलावा रोजाना केवल तीन घंटे पढ़ाई की है। यह कहना है कुलाधिपति स्वर्ण पदक पाने वाले विश्वेश कुमार सिंह का। इन्होंने सीएसए के इटावा स्थित प्रौद्योगिकी कॉलेज से बीटेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) में 8.48 ओजीपीए पाए हैं। पिता विद्यानाथ सिंह सेवानिवृत्त और मां रश्मि सिंह गृहिणी हैं। बनारस निवासी विश्वेश सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। सरकारी सेवा में नौकरी पाना उनका लक्ष्य है।

गोल्ड पाने के लिए तपना भी पड़ता है
गोल्ड ऐसे ही नहीं मिल जाता, इसको पाने के लिए तपना भी पड़ता है। यह कहना है इटावा के प्रौद्योगिकी कॉलेज से बीएफएससी में 8.59 ओजीपीए अंक पाने वाली साक्षी मौर्य का। लखनऊ निवासी साक्षी ने बताया कि वह इस समय केंद्रीय कृषि विवि त्रिपुरा से एमएफएससी की पढ़ाई कर रही हैं। पिता आलोक कुमार मौर्य आर्किटेक्चर और मां उर्मिला मौर्य गृहिणी हैं।
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