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Mahoba: क्रशर कारोबारी की मौत मामले में एक और उपनिरीक्षक पर भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज, पढ़ें पूरा मामला

Thu, 28 Dec 2023 09:35 PM IST
आकाश दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा

सार

भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ओर से की गई जांच में 11 लाख सात हजार 157 रुपये आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की पुष्टि हुई है। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने के निर्देश दिए थे।
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क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की फाइल फोटो - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मौत के मामले में एक और उप निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज हुई है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ओर से की गई जांच में 11 लाख सात हजार 157 रुपये आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की पुष्टि हुई है। मामले की विवेचना भ्रष्टाचार निवारण संगठन अपराध अनुसंधान विभाग लखनऊ करेगी।

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क्रशर कारोबारी की मौत के मामले में एसआईटी ने जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने के निर्देश दिए थे। मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन को सौंपी गई थी। कानपुर ईकाई की ओर से की गई खुली जांच में पाया गया कि उप निरीक्षक राजू सिंह थाना खरेला में थानाध्यक्ष के पद पर तैनात थे। वह मूल रूप से जनपद फतेहपुर के काकाबेरी गांव निवासी है।

वर्तमान में उनकी तैनाती थाना दुबग्गा कमिश्नरेंट लखनऊ में है। जांच के लिए निर्धारित की गई अवधि में उप निरीक्षक राजू सिंह ने आय के सभी ज्ञात और वैध स्रोतों से 38 लाख 31 हजार 249 रुपये की आय अर्जित की। जिसके सापेक्ष 49 लाख 38 हजार 406 रुपये का व्यय किया गया। जिससे 11 लाख सात हजार 157 रुपये का आय से अधिक व्यय पाया गया। इस संबंध में वह कोई स्पष्टीकरण नहीं दे सके। भ्रष्टाचार निवारण संगठन कानपुर मंडल के निरीक्षक चंद्रभान सिंह ने महोबा शहर कोतवाली में उप निरीक्षक राजू सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। इससे पहले पांच उप निरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है।
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यह था मामला
क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने सात सितंबर 2020 को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया में वीडियो वायरल किया था। आठ सितंबर को उनके गले में गोली लगी थी और 13 सितंबर को उनकी मौत हो गई थी। इस मामले की जांच एसआईटी ने की थी। मामले में तत्कालीन एसपी, थानाध्यक्ष कबरई देवेंद्र शुक्ला, सिपाही अरुण यादव, व्यापारी सुरेश सोनी और ब्रह्मदत्त भ्रष्टाचार व आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पाए गए थे। जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्तमान में एसपी, थानाध्यक्ष और सिपाही जेल में है जबकि सुरेश सोनी व ब्रह्मदत्त जमानत पर बाहर हैं। वर्ष 2020 में जिले में तैनात रहे सभी उप निरीक्षकों की आय से अधिक संपत्ति की जांच चल रही है।

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