कानपुर। आम बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने के साथ ही सरकार ने आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र की इकाइयों में रखरखाव, मरम्मत या अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण के लिए आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क से छूट का प्रस्ताव किया है। इससे पहले इन पर औसतन 17-18 प्रतिशत जीएसटी लगता था। कानपुर शहर लड़ाकू विमानों के उपकरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां निजी क्षेत्र की एक कंपनी इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके अतिरिक्त शहर के डिफेंस कॉरिडोर में जल्द ही गोलियों के अलावा अन्य हथियार भी बनने लगेंगे।
शहर में तीन आयुध कंपनियों के मुख्यालय हैं। इसके अलावा साढ़ के डिफेंस कॉरिडोर में रक्षा-प्रतिरक्षा उत्पादों के व्यापक उत्पादन की योजना है। आयुध कंपनियों में तोप, टैंक की बैरल, छोटे हथियार, पैराशूट, टेंट और जूते जैसे विभिन्न उत्पादों का निर्माण होता है। शहर का सालाना रक्षा उत्पादों का कारोबार 2000-2500 करोड़ रुपये है जिसमें लगातार वृद्धि देखी जा रही है। आयुध कंपनियां उत्पादों का निर्यात भी सक्रिय रूप से करने लगी हैं। रक्षा मंत्रालय (सिविल) का बजट मामूली घटकर 28,554.61 करोड़ रुपये हो गया है जबकि रक्षा सेवाओं (राजस्व) का बजट 17.24 प्रतिशत बढ़कर 3,65,478.98 करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा पूंजीगत व्यय में 21.84 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि हुई है जो 2,19,306.47 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा पेंशन का आवंटन भी 6.53 प्रतिशत बढ़कर 1,71,338.22 करोड़ रुपये हो गया है। कुल मिलाकर, बजट में रक्षा क्षमता और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
कच्चे माल पर सीमा शुल्क में छूट से उद्योग को बढ़ावा
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की औद्योगिक कमेटी के सदस्य और डिफेंस उद्यमी सुशील शर्मा के अनुसार, बजट में असैनिक, प्रशिक्षण और अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक कलपुर्जों पर मूलभूत सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। यह छूट रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर लागू होगी, जिससे शहर के रक्षा उद्योग को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। हालांकि, उन्होंने रक्षा खरीद में जीएसटी में बदलाव और जेम पोर्टल पर खरीद प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया। शहर में रक्षा-प्रतिरक्षा उत्पादों के उपकरणों का बड़े पैमाने पर उत्पादन एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को बढ़ावा देगा।