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यूपी: पांच भाइयों ने पैदा की थी कानपुर में दहशत, अफजाल की गिरफ्तारी के साथ डी-2 गैंग का चैप्टर क्लोज

Wed, 22 Dec 2021 12:05 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सन 2004 में हीर पैलेस के बाहर डी-2 गैंग की पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। गिरोह के सरगना रफीक ने एसटीएफ के सिपाही धर्मेंद्र चौहान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना में अफ जाल भी नामजद था। गैंग की चर्चा पूर्वांचल के बड़े माफियाओं के बीच भी होने लगी थी।
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अफजाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अफजाल की गिरफ्तारी के साथ ही 20 साल पहले आतंक का पर्याय बने डी-2 गैंग का चैप्टर क्लोज हो गया है। गैंग के कुछ सदस्य मर चुके हैं, बाकी जेल में हैं। डी-2 गैंग और इंटर स्टेट 273 गैंग को सरगना रफीक अपने पांच भाइयों अतीक, शफीक, बिल्लू, बाले और अफजाल के साथ मिलकर खड़ा किया था।
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इस गैंग ने करीब दो दशक पहले अपराध की एक नई इबारत लिख दी थी। रंगदारी, अपहरण, फिरौती, मादक पदार्थों, असलहों की तस्करी, सुपारी किलिंग, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करने जैसे अपराध करने में यह गैंग माहिर था। गैंग को मजबूती देने का काम मोस्टवांटेड रफीक करता था।

2005 में रफीक की हत्या के बाद गैंग की मानो रीढ़ टूट गई। रफीक की मौत का फायदा उसके भतीजे टायसन ने उठाया और गिरोह की कमान अपने हाथों में ले ली। पिंटू सेंगर हत्याकांड के आरोप में उसे भी जेल भेजा गया। उधर छह में तीन भाइयों की मौत हो गई।
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जेल भेजे गए अफजाल के अलावा अतीक आगरा जेल में बंद है। सरगना रफीक को कोलकाता से पुलिस रिमांड पर कानपुर लाई थी, तभी दूसरे गैंग ने उसकी हत्या कर दी थी। मुंबई जेल में शफीक की भी मौत हो चुकी है। बिल्लू की भी मौत हो चुकी है। बाले कानपुर जेल में बंद है। 

2004 में रफीक ने की थी एसटीएफ सिपाही की हत्या
सन 2004 में हीर पैलेस के बाहर डी-2 गैंग की पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। गिरोह के सरगना रफीक ने एसटीएफ के सिपाही धर्मेंद्र चौहान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना में अफजाल भी नामजद था। गैंग की चर्चा पूर्वांचल के बड़े माफियाओं के बीच भी होने लगी थी। पूर्वांचल के एक बड़े माफिया ने भी इस गैंग से कई घटनाएं कराई थीं। 
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