अफजाल की गिरफ्तारी के साथ ही 20 साल पहले आतंक का पर्याय बने डी-2 गैंग का चैप्टर क्लोज हो गया है। गैंग के कुछ सदस्य मर चुके हैं, बाकी जेल में हैं। डी-2 गैंग और इंटर स्टेट 273 गैंग को सरगना रफीक अपने पांच भाइयों अतीक, शफीक, बिल्लू, बाले और अफजाल के साथ मिलकर खड़ा किया था।
इस गैंग ने करीब दो दशक पहले अपराध की एक नई इबारत लिख दी थी। रंगदारी, अपहरण, फिरौती, मादक पदार्थों, असलहों की तस्करी, सुपारी किलिंग, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करने जैसे अपराध करने में यह गैंग माहिर था। गैंग को मजबूती देने का काम मोस्टवांटेड रफीक करता था।
2005 में रफीक की हत्या के बाद गैंग की मानो रीढ़ टूट गई। रफीक की मौत का फायदा उसके भतीजे टायसन ने उठाया और गिरोह की कमान अपने हाथों में ले ली। पिंटू सेंगर हत्याकांड के आरोप में उसे भी जेल भेजा गया। उधर छह में तीन भाइयों की मौत हो गई।