सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
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इस दौरान प्रतीक स्वरूप बैंक की ओर से डिमांड ड्राफ्ट भी दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि देश के इतिहास में पहली बार कोई बैंक इस तरह के मामले में अंतरिम मुआवजा राशि दे रहा है। इसके साथ ही न्याय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की है।
किन्हें, कितना मिला मुआवजा
पीड़ित दावा भुगतान
मंजू भट्टाचार्य 30 लाख 25 लाख
एसके पोद्दार 30 लाख 25 लाख
राजाबेटी गुप्ता 35 लाख 25 लाख
निर्मला तहलियानी 35 लाख 25 लाख
अमिता गुप्ता 43.56 लाख 25 लाख
मीना यादव 80 लाख 50 लाख
सीता गुप्ता 20 लाख 17.5 लाख
सुशीला शर्मा 42 लाख 25 लाख
पंकज गुप्ता 35 लाख 25 लाख
वैभव माहेश्वरी 25 लाख 20 लाख
महेंद्र सविता 02 लाख 02 लाख
स्त्री धन बना फार्मूले का आधार
लॉकर में कोई ग्राहक क्या रखता है, इसकी कोई जानकारी ग्राहक की ओर से नहीं उपलब्ध कराई जाती है और न ही बैंक मांगता है। केवल किराया लिया जाता है। इस पूरे मामले में लॉकर धारक ज्यादातर महिलाएं थीं। आयकर कानून में भी पांच सौ ग्राम तक सोना होने पर कोई पूछताछ नहीं की जाती है। इस प्रकार का सोना महिला का स्त्री धन माना जाता है। इसी आधार पर बैंक ने पीड़ितों को प्रस्ताव दिया। इस पूरे मामले में बैंक के मैनेजर और लॉकर इंचार्ज की भूमिका पुलिस की जांच में आ रही है। ऐसे में प्रबंधन अपनी साख बचाने के लिए मुआवजा देने को तैयार हुआ। मीना यादव के लॉकर में उनकी बहन के भी गहने थे। ऐसे में उन्हें 50 लाख का भुगतान किया जा रहा है।