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सीबीएसई : पहली परीक्षा अनिवार्य, अंक सुधार के लिए दे सकते दूसरी परीक्षा

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कानपुर। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन में 10वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति है। न केवल छात्र बल्कि कुछ स्कूल भी भ्रमित हैं। पहली परीक्षा देनी है या दूसरी, प्रैक्टिकल कितनी बार होंगे, दूसरे प्रयास में कितने विषय की परीक्षा दे सकते हैं जैसे सवाल छात्रों के मन में घूम रहे हैं। कई स्कूल के प्रधानाचार्य अभी सीबीएसई के नए सरकुलर को लेकर अपडेट नहीं है।
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सीबीएसई ने छात्रों की सहूलियत के लिए 10बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव किया है। इसी सत्र से बोर्ड परीक्षा दो बार आयोजित की जाएगी। पहली परीक्षा फरवरी और दूसरी मई में होगी। अभी भी कई छात्रों को भ्रम है। छात्रों को इसी भ्रम को दूर करने के लिए अमर उजाला ने कुछ विशेषज्ञों और प्रधानाचार्यों से बात की है।
शिक्षाविद अमित निरंजन ने बताया कि सबसे बड़ा भ्रम परीक्षा में बैठने को लेकर है। कुछ छात्रों को लगता है कि पहली बार की परीक्षा देना अनिवार्य नहीं है जबकि ऐसा नहीं है। सभी छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा में बैठना अनिवार्य होगा। बिना पहली परीक्षा दिए दूसरी परीक्षा में नहीं बैठ सकते हैं। पहली परीक्षा फरवरी में होगी। मई में होने वाली दूसरी परीक्षा देना सभी छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं है। जो छात्र अपने अंकों में सुधार लाना चाहते हैं या फिर पहली परीक्षा में अनुपस्थित होंगे वह दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
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केंद्रीय विद्यालय तीन चकेरी के प्रधानाचार्य राजगुरु ने बताया कि पहली परीक्षा में पांच विषयों में किसी तीन विषयों में अनुपस्थित होने पर ही दूसरी परीक्षा में बैठ सकते हैं। इससे अधिक विषयों में अनुपस्थित रहे हैं तो दूसरी परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। छात्र को फेल ही मान लिया जाएगा।

डॉ. अमित निरंजन ने बताया कि अगर छात्र दोनों परीक्षाओं में बैठता है तो बेहतर अंक वाले विषयों को लेकर ही रिजल्ट जारी किया जाएगा। छात्र पहली परीक्षा में जिन विषयों को चुनते हैं दूसरी परीक्षा में ही उन विषयों को लेना अनिवार्य होगा। इसके बाद कक्षा 10 के छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा नहीं होगी। प्रैक्टिकल और आंतरिक परीक्षाएं साल में एक बार ही होंगी।
डॉ. निरंजन ने बताया कि दो परीक्षा होने से छात्रों को लाभ मिलेगा। सुधार परीक्षा होने की वजह से छात्रों का तनाव कम होगा। पहले सप्लीमेंट्री परीक्षाएं होती थी लेकिन उसमें समय काफी लगता था। कई बार नया सत्र शुरू होने के बाद परिणाम आता था।
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