सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल के निवास और कानपुर के कृष्णापुरम स्थित कंपनी के मुख्यालय के अलावा, आवास विकास, काकादेव, कल्याणपुर स्थित कार्यालय व कर्मचारियों के घरों, फतेहपुर (मलवां), नोएडा और रुड़की स्थित फैक्ट्रियों और कार्यालयों में छापा मारा था।
प्रदेश की सबसे बड़ी डिफाल्टर कंपनी श्री लक्ष्मी कॉटसिन के मालिक के आवास, कार्यालयों और कर्मचारियों के यहां छापा मारकर सीबीआई ने 500 से अधिक फाइलें जब्त की हैं। 23 बैंकों के 6833 करोड़ रुपये की बकायेदार कंपनी के 14 ठिकानों पर सीबीआई ने शनिवार सुबह छापा मारा था।
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रात तक चली कार्रवाई के दौरान सीबीआई टीमोें ने 20 से अधिक कंप्यूटर, लैपटॉप और हार्ड डिस्क भी कब्जे में ली हैं। इसके अलावा टीमों ने कंपनी के मालिक के परिवारीजनों से अलग-अलग घंटों पूछताछ भी की। बैंक से लिए गए हजारों करोड़ रुपये का इस्तेमाल, निवेश, प्रॉपर्टी, बैंक लॉकरों के बारे में जानकारी जुटाई।
सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल के निवास और कानपुर के कृष्णापुरम स्थित कंपनी के मुख्यालय के अलावा, आवास विकास, काकादेव, कल्याणपुर स्थित कार्यालय व कर्मचारियों के घरों, फतेहपुर (मलवां), नोएडा और रुड़की स्थित फैक्ट्रियों और कार्यालयों में छापा मारा था।
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दरअसल, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के डीजीएम राजीव खुराना ने एक जून 2021 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी। सीबीआई ने चार अगस्त को श्री लक्ष्मी कॉटसिन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 406, 420, 468, 471, 477ए में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
इसके बाद शनिवार सुबह छापा मारा था। कार्रवाई के बाद टीमें शनिवार देर रात लौट गईं। रोटोमैक ग्लोबल और फ्रस्ट इंटरनेशनल के बाद शहर की यह तीसरी कंपनी है, जिस पर बैंकों के डिफाल्टर होने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की है। सभी लोन दिल्ली स्थित बैंकों से लिए गए हैं।
तीन बेटे कर रहे अलग-अलग काम
कंपनी के मालिक एमपी अग्रवाल के तीन बेटे हैं। एक स्कूल संचालक है। दूसरा पान-मसाला का काम करता है, जबकि तीसरा बेटा कपड़े का कारोबारी है। कृष्णापुरम स्थित आवास और मुख्यालय पर बड़े पैमाने पर पुराने दस्तावेज टीमों को हाथ लगे हैं। इसके अलावा फतेहपुर, मलवां आदि में बंद प्लांटों के कार्यालयों से कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क आदि जब्त की गई हैं।
इन बैंकों का है इतना बकाया
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 1361.56 करोड़, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का 515.06, केनरा बैंक का 805.85, बैंक ऑफ बड़ौदा का 743.12, पंजाब नेशनल बैंक का 670.67, इंडियन बैंक का 345.27, एल्डवीज ऐसेट का 392.97, सारस्वत बैंक का 206.66, पीएनबी-ई ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का 254.25, एसबीआई का 181.87, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया-ई आंध्रा बैंक का 136.56, इलाहाबाद बैंक का 143.67, एसबीआई ई-स्टेट बैंक ऑफ मैसूर का 156.93, एसबीआई-ई-स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर का 138.93, एक्सिस बैंक का 92.04, यूबीआई-ई कारपोरेशन बैंक का 76.46, बैंक ऑफ बड़ौदा-ई विजया बैंक का 71.04, एग्जिम बैंक का 53.07, आईडीबीआई बैंक का 2.64, यूको बैंक हांगकांग का 27.02, यूको बैंक सिंगापुर का 27.02, आईएफसीआई लिमिटेड का 24.83 और केनरा बैंक-ई सिंडीकेट का 949.94 करोड़ रुपया बाकी है।