ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी) की बेशकीमती जमीनों को रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कौड़ियों के भाव बेचने के मामले की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। गुरुवार देर शाम को सीबीआई की दो सदस्यीय टीम दिल्ली मुख्यालय से कानपुर पहुंची। जांच अधिकारी मोहित कुमार की अगुवाई में टीम ने शहर स्थिति बीआईसी मुख्यालय में दस्तावेजों की जांच की।
बीआईसी के सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को अधिकारियों ने बीआईसी के अधीन रहीं कुल संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया। इसके बाद अब तक बेची जा चुकी जमीन की जानकारी मांगी और उससे संबंधित दस्तावेज तलब किए। कई जमीनों का भौतिक सत्यापन किया। हालांकि यह जमीनें अब शहर के उद्योगपतियों, बिल्डरों और भूमाफिया के अधीन हो चुकी हैं। अधिकारियों ने दस्तावेज में दर्ज सूचना और भौतिक सत्यापन की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की। कई अहम दस्तावेज जब्त किए। शुक्रवार को दोपहर बाद सीबीआई की टीम ने बीआईसी के अधिकारियों को बंद कमरे में बुलाकर उनके बयान लिए। समाचार लिखे जाने तक सीबीआई की टीम बीआईसी मुख्यालय में डटी थी।
यह है मामला
बीआईसी के अधिकारियों ने वर्ष 2005-06 में शहर के पॉश एरिया मेें स्थित बेशकीमती जमीनों का सौदा औने पौने दाम पर कर दिया था। खेल यह हुआ कि जो जमीन बेची गई उस पर उस वर्ष का सर्किल रेट लगाने के बजाय वर्ष 1981 का सर्किल रेट लगाया गया। यानी 24, 25 साल पुराने सर्किल रेट पर जमीन बेचकर एक एक जमीन पर चहेतों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया। वर्ष 2012 में सूती मिल मजदूर यूनियन ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इसकी शिकायत की थी। प्रदेश सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।