इसलिए सवालों के घेरे में है पुलिस
वारदात के वक्त इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी नवाबगंज थाने के थानेदार थे। अब वह गोविंद नगर थाने के प्रभारी हैं। वारदात के बाद सामने आया था कि महिला या उसकी बेटी पर कोई केस दर्ज ही नहीं था। बिना एफआईआर उनको थाने लाया गया। कानून के हिसाब से सूर्यास्त के बाद महिला या युवती से पूछताछ नहीं की जा सकती।
वहीं, मामले में पुलिस रात दो बजे तक पूछताछ करती रही थी। वह भी नाबालिग से। वहीं जब सखी केंद्र दाखिल किया था तब वहां दिए गए प्रार्थना पत्र में एफआईआर नंबर लिखा था, जबकि तब तक केस दर्ज नहीं हुआ था। दाखिल करने के सवा घंटे बाद केस दर्ज किया गया था। इस वजह से पुलिस सवालों के घेरे में है।
ये था मामला
नवाबगंज पुलिस 8 मई को उन्नाव निवासी सुदामा व उसकी नाबालिग बेटी को चोरी की शिकायत के मामले में थाने ले आई थी। महिला पर एफआईआर भी दर्ज नहीं थी। देर रात तक थाने में पूछताछ करने के बाद अवैध तरीके से सुदामा व किशोरी को आशा ज्योति केंद्र में दाखिल करवा दिया गया था।
दूसरे दिन सुबह केंद्र परिसर के बाथरूम में सुदामा का शव फंदे से लटकता मिला था। मामले में विभागीय व मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश हुए थे, लेकिन चार महीने बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। जांच तक ही कार्रवाई सिमट के रह गई थी।