विधानसभा में मुद्दा उठा
विधानसभा में दो दिन पहले अजामगढ़ के सपा विधायक दुर्गा प्रसाद व गुनौर से सपा विधायक राम खिलाड़ी सिंह यादव ने इस प्रकरण को लेकर सवाल उठाए थे। जिसमें कहा था कि पुलिस ने टेनरी पर कब्जा कराया। पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि सपा विधायक के बेटे को फंसाया गया।
इस मामले में कमिश्नरी पुलिस ने एक रिपोर्ट भेजी। जिसमें बताया गया कि सपा विधायक के बेटे का नाम हटा दिया गया है। इस बीच एक खबर चर्चा में आई कि पुलिस ने फर्जी रिपोर्ट भेज दी, जबकि कामरान का नाम चार्जशीट में शामिल है। जब तथ्य की पुष्टि की गई, तो पता चला कि नाम उसका बाहर हो चुका है। चार्जशीट अभी नहीं लगी है।
सवालों के घेरे में पुलिस
जब विवाद हुआ था, तब पुलिस वहां खुद मौजूद थी। मामले में खुद पुलिस वादी थी। पुलिस के सामने ही पूरी घटना हुई थी। मामले में पुलिस द्वारा खुद तहरीर लिखी गई थी। ऐसे में कामरान का नाम बाहर करने पर पुलिस ही सवालों के घेरे में आ गई है।
बता दें कि जिस तरह से कामरान को क्लीनचिट दी गई है, उससे साफ हो गया है कि पुलिस ने गलत नामजदगी की थी। इसमें ये भी हो सकता है कि किसी दबाव में नाम बाहर किया गया है। दोनों ही स्थिति में पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं।
ये था पूरा मामला
जाजमऊ में 13 जुलाई को शालीमार टेनरी पर कब्जे को लेकर बवाल हो गया था। शहनाज जहां व उनके भतीजे के पक्ष के लोग आमने सामने हो गए थे। इसमें शहनाज की तरफ से नारायण सिंह भदौरिया और उसके गुर्गे थे, तो दूसरे पक्ष से सपा नेता। दोनों के बीच जमकर बवाल और मारपीट हुई थी।