बैंक अधिकारियों के अनुसार बैंक से भी शाखा प्रबंधकों को क्लोजिंग पर लक्ष्य मिलता है कि उन्हें कितनी धनराशि लोन में देनी है और कितनी बचत खाते में जमा करानी होती है।
सीबीआई ने पंजाब नेशनल बैंक की मेस्टन रोड शाखा में खोले गए फर्जी खातों की जांच फिर शुरू कर दी है। बैंक कर्मियों को बुलाकर पूछताछ की गई। जांच तीन सालों से ठंडे बस्ते में थी। पीएनबी की मेस्टन रोड शाखा में वर्ष 2013 से 2015 के बीच 7.21 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ था।
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ये रुपये फर्जी तरीके से खोले गए 10 खातों में डाले गए थे। आरोप था कि उन खातों में क्लोजिंग का समय आने से पहले रुपये डाल दिए जाते थे, क्लोजिंग समाप्त होते ही वापस उस रकम को निकाल लिया जाता था। बैंक अधिकारियों के अनुसार बैंक से भी शाखा प्रबंधकों को क्लोजिंग पर लक्ष्य मिलता है कि उन्हें कितनी धनराशि लोन में देनी है और कितनी बचत खाते में जमा करानी होती है।
बैंक की आंतरिक जांच में फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर मामले की जांच सीबीआई को दी गई थी। सीबीआई की प्राथमिक जांच में पता चला कि शाखा में 10 खाते बिना केवाईसी के ही खोल दिए गए थे। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया था।
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इनके नाम से खोले गए थे फर्जी खाते
बाल मुकुंद त्रिवेदी, जवाहर लाल, बउवा त्रिवेदी, सोहन लाल पांडेय, अनुराग पांडेय, राम प्रकाश, बी प्रसाद सौरभ पांडेय, आईसी त्रिवेदी व अंकित त्रिवेदी के नाम से खाते खोले गए थे।