कानपुर में सेंट्रल बैंक की कुल 53 शाखाएं हैं। पिछले साल केवल तीन ब्रांच के महज 54 लॉकर तोड़े गए। इसमें सीडी रोड शाखा के 12, शास्त्री नगर शाखा के 9 व गोविंद नगर शाखा के 33 लॉकर शामिल हैं। इन तीनों शाखाओं में सिर्फ एक बार ही ये कार्रवाई की गई। वहीं इस साल सीसामऊ शाखा में 25 लॉकर तोड़े गए हैं।
कानपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में लॉकर से जेवरात गायब होने की तफ्तीश के दौरान एक बड़ा तथ्य सामने आया है। बैंक की कराची खाना शाखा में एक साल के भीतर चार बार में कुल 79 लॉकर तोड़े गए थे। ये आंकड़ा चौंकाने वाला है। क्योंकि इतनी बार लॉकर तोड़ने की कार्रवाई पिछले कई वर्षों में किसी भी शाखा में नहीं की गई।
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पूरी आशंका है कि जेवरात गायब करने का खेल इन्हीं चार बार में इन्हीं लॉकरों से किया गया। फिलहाल एसआईटी हर एक तथ्य जुटाकर कार्रवाई करने में लगी है। डीसीपी पूर्वी प्रमोद कुमार मंगलवार को मामले की जांच करने बैंक पहुंचे थे। बैंक अफसरों के अलावा कमेटी के सदस्यों से पूछताछ की थी।
इस दौरान डीसीपी ने बैंक अफसरों से प्रत्येक शाखा का लॉकर संबंधी ब्योरा मांगा था। बुधवार को ये डाटा बैंक ने उपलब्ध कराया, जिससे खुलासा हुआ कि बैंक की कराची खाना में ही एक साल के भीतर सबसे अधिक लॉकर तोड़े गए। शाखा में 612 लॉकर अभी भी खाली पड़े हैं। ऐसे में सवाल है कि लॉकर तोड़ने की इतनी जल्दी क्या थी कि चार-चार बार कार्रवाई की गई। डीसीपी का कहना है कि इससे यही आशंका है कि जेवरात पार करने के लिए चार बार लॉकर तोड़ने की कार्रवाई की गई है।
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अन्य तीन ब्रांच में पिछले साल तोड़े गए सिर्फ 54 लॉकर
कानपुर में सेंट्रल बैंक की कुल 53 शाखाएं हैं। पिछले साल केवल तीन ब्रांच के महज 54 लॉकर तोड़े गए। इसमें सीडी रोड शाखा के 12, शास्त्री नगर शाखा के 9 व गोविंद नगर शाखा के 33 लॉकर शामिल हैं। इन तीनों शाखाओं में सिर्फ एक बार ही ये कार्रवाई की गई। वहीं इस साल सीसामऊ शाखा में 25 लॉकर तोड़े गए हैं। इसके अलावा अन्य शाखाओं में 2017 या 2018 में लॉकर तोड़ने की कार्रवाई हुई थी। तब से वहां लॉकर नहीं तोड़े गए। इसके पहले कराची खाना शाखा में 2018 में दो बार में कुल 29 लॉकर तोड़े गए थे।
पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए दी अर्जी
डीसीपी ने बताया कि आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जाएगा। इसके लिए बुधवार को कोर्ट में अर्जी दे दी गई है। हालांकि सुनवाई नहीं हो सकी। अब अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। आरोपियों की दस दिन की रिमांड मांगी गई है।
सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम
डीसीपी ने बताया कि घटना से संबंधित अधिक से अधिक सीसीटीवी फुटेज जुटाए जा रहे हैं। वहीं सर्विलांस की मदद से भी कुछ नंबर चिन्हित किए जा रहे हैं। जिससे आरोपियों व सराफ की मिलीभगत भी उजागर हो सके। कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जिस आधार पर सराफ चिह्नित किए गए हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
बरामद माल शिनाख्त न कराने पर सवाल
पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के साथ-साथ उनके पास से कुछ जेवरात बरामद किए थे। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस बरामद माल की शिनाख्त नहीं कराई है। इससे वह बेहद आक्रोशित हैं।