कोच और किशोरी के बीच बातचीत के अंश
कोच: ट्रेनिंग पर क्यों नहीं आ रही हो...?
किशोरी: कल से आएंगे भैया।
कोच: हां...ट्रेनिंग पर आना शुरू करो...बहुत दिन हो गए हैं।
कोच:...और तुम्हारे भैया के क्या हालचाल हैं?
किशोरी: हंसते हुए...ठीक है।
कोच: तुम्हारे भैया तो सबसे शिकायतें करते फिर रहे हैं कि हमने तुम्हें हरवा देंगे...क्यों? हमने तुमसे ऐसा कुछ कहा था क्या?
किशोरी: नहीं...।
कोच: अपने भाई से बोलो क्यों किसी को फालतू में परेशान करना? बोलो अपना काम करो...हमतो तुम लोगों का सपोर्ट करते हैं?
कोच: तुम सही बताना...हम तुम्हारा टूर्नामेंट में हर तरह से सपोर्ट कर रहे थे या नहीं? तुम्हारी फाइट को लेकर हो...तुम्हारे डॉक्युमेंट्स को लेकर हो...तुम्हारे ट्रेनिंग पर जो तुम जा आ रही थी...उसकी डिटेल तुम्हें कौन भेज रहा था?
किशोरी: आप...।
कोच: तो तुम्हारे भाई क्यों किसी से झूठी शिकायत कर रहे हैं? अगर उनको कोई हमसे दिक्कत है तो हमसे सीधे बात कर लें? तुमको क्यों बीच में लाते हैं...उन्हें सोचना चाहिए कि उनकी छोटी बहन है...फालतू में सब जगह नाम जाता है।
कोच: सच बताना क्या हमें उस टूर्नामेंट से कोई मतलब था?
किशोरी: नहीं...।
कोच: तुम्हारी टीम कोच हम थे क्या? तुम लोगों को हम सुरक्षित कानपुर लेकर आए...जबकि मेरा वहां कोई रोल नहीं था। अपने भाई को समझाओ कि फालतू में किसी को परेशान करना अच्छी चीज नहीं है।
कोच: देखो फर्क तो हमें वैसे भी कुछ नहीं पड़ रहा...न भविष्य में पड़ेगा क्योंकि जो सच होता है, जो झूठ होता है वो दिखता है...तुमको पता है क्या सच है और क्या झूठ है...तुमको भी पता है।
किशोरी: और बताओ...।
कोच: मुन्ना डॉन यार तुम समझाओ अपने भैया को...एक तो तुम लोगों की हेल्प करो इतनी...हमको तो लगता है तुम्हारी हेल्प करना ही गलत है क्यों?
किशोरी: ऐसा नहीं है भैया...
कोच: तो तुम बताओ हमें क्या करना चाहिए?
किशोरी: अब हम क्या बताएं...हम बीच में फंस जाते हैं हमेशा।
कोच: पता नहीं हमारे पीछे क्यों पड़े हैं वो? हर चीज में सपोर्ट करो इसके बावजूद...।
कोच: बाकी तुम देखो अपना...अगर सब ठक है तो ट्रेनिंग पर आना स्टार्ट कर देना। बाकी तुम्हारे भैया ऐसी हरकतें करेंगे तो वो हमको भी परेशान करेगा।