यूपी बोर्ड के इंटर कॉलेजों ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दी है। यह पहला मामला नहीं है जब यूपी बोर्ड के इन स्कूलों ने अपनी लापरवाही का इतना बड़ा सबूत दिया है। ऐसा कई बार हो चुका है। ताज्जुब इस बात का है कि यूपी बोर्ड भी ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए मामले की जिम्मेदारी स्कूलों पर थोपकर बचता दिख रहा है। जबकि बोर्ड को ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए कदम उठाना चाहिए।
अकेले कानपुर शहर में 543 स्कूलों ने अभी तक माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर स्टूडेंटों के इंटरनल मार्क्स अपलोड नहीं किए गए हैं। ऐसे ही प्रदेशभर में कई स्कूल हैं। डेडलाइन 28 फरवरी तय की गई है। अब अंतिम तिथि तक जिन स्टूडेंटों के इंटरनल मार्क्स अपलोड नहीं होंगे, उनकी मार्कशीट बोर्ड की तरफ से रोक दी जाएगी।