कानपुर में कोरोना से ठीक हो चुके रोगियों के दांतों पर भी ब्लैक फंगस हमला कर रहा है। यह मसूड़ों में घुसकर दांत की कैविटी को गलाने लगता है। इसके साथ ही मुंह का तालू का मांस फंगस के संक्रमण के कारण गलने लगता है। तालू पर छाले पड़ना इसके मुख्य लक्षण हैं।
कानपुर में इस तरह की पहली महिला रोगी मिली है। रोगी की पहचान जेके कैंसर इंस्टीट्यूट के दंत रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) एके मेहरोत्रा की ऑनलाइन ओपीडी में हुई है। प्रोफेसर मेहरोत्रा ने बताया कि रोगी ने तालू में छाले और मसूड़ों के ऊपर कालापन की दिक्कत बताई थी।
जब उसके मुंह के अंदर का पूरा वीडियो मंगाकर देखा और जांच की गई तो ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। फंगस का संक्रमण साइनस में पहुंचकर ऊपर जा रहा था। रोगी के मुंह पर भी हल्की सूजन आ गई थी। रोगी को कोविड का संक्रमण रहा है।
उसके इलाज का ब्योरा लिया गया तो उसे स्टेरॉयड भी दिया गया था और ब्लड शुगर लेवल भी अधिक बना हुआ था। फंगस के फैलाव का पता करने के लिए रोगी को ईएनटी विशेषज्ञ के पास भेजा गया। उन्होंने बताया कि अगर इस स्थिति मेें रोगी की पहचान हो जाए तो उसे ठीक किया जा सकता है।
फंगस जहां लगती है, उस हिस्से के मांस को गला देती है। हड्डी निकल आती है। साइनस के लिंक मस्तिष्क में खुलते हैं। इसी से यह मस्तिष्क में पहुंच जाती है। अगर जल्दी इसे डायग्नोस कर लिया जाए तो उसे ठीक किया जा सकता है। रोगी को अलर्ट रहने की जरूरत है। लक्षण दिखे तो जांच करा लें।
डॉ. एके मेहरोत्रा