केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह, रमापति राम त्रिपाठी, रीता जोशी जैसे सांसदों की सीटों के साथ ही भाजपा ने प्रदेश की 23 सीटों पर अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। इनमें कानपुर नगर लोकसभा की सीट भी शामिल है।
मजे की बात यह है कि भाजपा ने महानगर सीट से अपने किसी भी सांसद को अभी तक केंद्र में मंत्री नहीं बनाया है, इसके बावजूद यह सीट पार्टी की नजर में काफी वीआईपी मानी जा रही है। शायद इसी वजह से टिकट को लेकर इतनी मशक्कत चल रही है।
कहा जा रहा है कि कानपुर सीट पर जो भी प्रत्याशी भाजपा घोषित करेगी, उसका असर आसपास की लोकसभा सीटों पर भी पड़ने की संभावना है। जातिगत आधार पर भी और वोट बैंक के आधार पर भी।
माना जा रहा है कि महानगर सीट पर सबसे बड़ा वोट बैंक ब्राह्मण बिरादरी का रहता है। पहले के चुनावों में भी यह साबित हो चुका है। ऐसे में पार्टी पूरी छानबीन के आधार पर ही कोई चेहरा घोषित करना चाहती। प्रत्याशी घोषित होने में देरी की एक वजह यह भी बताई जा रही है।
कांग्रेस ने भी इस सीट पर साध रखी है चुप्पी
इसी तरह पार्टी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी को लेकर भी मंथन कर रही है। भाजपा में प्रत्याशी घोषित होने की देरी की वजह से कांग्रेस ने भी फिलहाल इस सीट को लेकर चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस के पास चूंकि इस बार श्रीप्रकाश का चेहरा नहीं है, ऐसे में किसी नए पर दांव लगाने के लिए भी मशक्कत चल रही है।
इधर पचौरी का नाम पहली सूची में घोषित नहीं होने की वजह से कई अन्य ब्राह्मण चेहरों के साथ वैश्य बिरादरी के भाजपा नेता भी सक्रिय हो गए हैं। इस बीच पता चला है कि भाजपा केंद्रीय इकाई की ओर से भी सर्वे कराए गए हैं। उसे भी प्रत्याशी चयन का आधार बनाया जा सकता है।
भाजपा नेताओं ने बदली डीपी
पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू यादव की ओर से पीएम मोदी पर टिप्पणी करने के बाद भाजपा नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मोदी का परिवार लिखकर पोस्ट किया है। अधिकांश ने अपने डीपी में मोदी का परिवार लिख लिया है।