अभियोजन को एक झटका तब लगा जब कड़ी मशक्कत के बाद आखिर कोर्ट ने खुशी को नाबालिग मान लिया। हालांकि इसके बाद भी खुशी की मुसीबतें कम नहीं हुईं। हाईकोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो वहां भी अभियोजन खुशी की रिहाई रोकने के लिए कानूनी दांवपेंच का इस्तेमाल करता रहा।
जल्द होगी खुशी की रिहाई
आखिर चार जनवरी की सुबह सुप्रीम कोर्ट से खुशी को जमानत मिल गई। खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि आदेश की प्रति मुकदमे की सुनवाई कर रही कानपुर देहात की विशेष अदालत में दाखिल कर दी गई है। जल्द ही रिहाई हो जाएगी।
शुक्रवार को कोर्ट जमानत धनराशि व अन्य शर्तें तय कर देगी, जिसके बाद शनिवार या सोमवार को जमानतें दाखिल कर दी जाएंगी। कोर्ट जमानतों का सत्यापन कराएगी और सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही खुशी की रिहाई का परवाना जारी हो सकेगा।
जमानतगीरों का इंतजाम भी टेढ़ी खीर
खुशी के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हैं। बिकरू कांड से जुड़े मुख्य मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि फर्जी तरीके से सिम का इस्तेमाल करने के धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है।
आदेश मिलने के बावजूद धोखाधड़ी मामले में भी अब तक खुशी की ओर से जमानतें दाखिल नहीं की गई हैं। दो जमानतें इस मामले में दाखिल करनी हैं। वहीं बिकरू मामले में भी जमानत आदेश आने के बाद रिहाई के लिए जमानतें दाखिल करनी होंगी। एक साथ इतने जमानतगीरों की व्यवस्था करना भी खुशी के परिवारवालों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है।