बंदर पकड़ने वाली एजेंसी एक लाख रुपये मांग रही है। ऐसे में जब बंदर जानलेवा हो गए हैं, तो वन विभाग की टीम को कम से कम यहां से बंदरों को खदेड़ ही देना चाहिए। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से बंदर पकड़वाने की मांग की है। टीम में एसडीओ प्रमिला, उप वनाधिकारी राजेश सिंह चौहान, वन दरोगा रामप्रसाद, रेंजर सत्येंद्र रहे।
छह माह में कई हो चुके घायल
पिपरगवां गांव में भी बंदरों का आतंक है। करीब छह माह में लगभग दर्जनभर लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं। बंदरों के काटने पर तमाम ग्रामीणों को पीएचसी और जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना पड़ी। अभी भी बंदरों का आतंक है। ग्रामीण लगातार इन्हें पकड़वाने के लिए उच्चाधिकारियों से मांग कर रहे हैं।
बंदरों के हमले में महिला की भी गिरने से हो चुकी है मौत
तिंदवारी ब्लॉक के छापर गांव में ही दो माह पूर्व भी 65 वर्षीय तेजनिया बंदरों के खदेडने गई थी। इस दौरान बंदरों ने उस पर हमला कर दिया था। बंदरों से बचने के लिए भागने समय वह छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिजन उसे अस्पताल लाने की तैयारी कर रहे थे। तब तक उसने दम तोड़ दिया था।