इस पर अभियोजन पक्ष ने संतोषी से श्यामू की गिरफ्तारी को लेकर एक के बाद एक सवाल पूछे, तो वो लड़खड़ा गई। अभियोजन की जिरह में उसने बताया कि श्यामू बाजपेयी को पुलिस ने मेरे सामने गिरफ्तार नहीं किया था। एक सवाल के जवाब में उसने बताया कि मैंने कोई शिकायत उच्च अधिकारियों को श्यामू मेरे सामने के घर से गिरफ्तारी होने के संबंध में नहीं की थी। न ही पिता व बहन ने कोई शिकायत की थी। संतोषी ने कहा कि आठ जुलाई 2020 को टेलीविजन से गिरफ्तारी की जानकारी हुई थी। इसकी पुष्टि सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा व शशिभूषण सिंह चौहान ने भी की।
सजा में फोरेंसिक रिपोर्ट रही महत्वपूर्ण, श्यामू के दाएं हाथ में लगा मिला था नाइट्राइड
मामले में अभियोजन की तरफ से कानपुर में फोरेंसिक फील्ड यूनिट में तैनात डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने अदालत में पेश होकर अपने बयानों में कहा था कि 21 जुलाई 2020 को उनके कार्यालय में श्यामू बाजपेयी के हाथों का कॉटन स्वेब परीक्षण के लिए प्राप्त हुआ था। उसका माइक्रो केमिकल परीक्षण करने पर फायरिंग का अवशेष नाइट्राइड मौजूद मिला था। वहीं वेंसडीन परीक्षण में रक्त की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इस पर ओबटी कार्ड परीक्षण व इलेक्ट्रो फोरेंसिक विधि से परीक्षण किया गया। इसमें भी मानव रक्त मौजूद मिला। डॉक्टर के बयानों के आधार पर अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि दोषी ने जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग की थी।
इनकी गवाही बनी सजा का आधार
सजा पाए दोषी श्यामू के मामले में अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए थे। इनकी गवाही सजा का आधार बनी। मामले में वादी मुकदमा तत्कालीन थानाप्रभारी रमाकांत पचौरी, निरीक्षक शेष नारायण पांडेय, हेड कांस्टेबल सत्यवीर सिंह, दरोगा संतोष कुमार, अजहर इशरत, फोरेंसिक फील्ड यूनिट के डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, कांस्टेबल राहुल सिंह व इंस्पेक्टर केएन राय ने गवाही दी।