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बिकरू कांड: आरोपी खुशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के 10 दिन बाद भी नहीं हो सकी रिहाई, ये है वजह

Sun, 15 Jan 2023 01:22 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से खुशी को जमानत मिल गई थी। जमानत आदेश सेशन कोर्ट में दाखिल करने के बाद 6 जनवरी को कोर्ट ने खुशी को डेढ़-डेढ़ लाख की दो जमानतें दाखिल करने पर रिहा करने के आदेश दिए थे। दो जमानतें कोर्ट में दाखिल कर दी गई थीं। इसके बावजूद 10 दिन बाद भी खुशी की जेल से रिहाई नहीं हो सकी।
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खुशी दुबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिकरू कांड में आरोपी खुशी दुबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के दस दिन बाद भी खुशी की जेल से रिहाई नहीं हो सकी है। खुशी को पुलिस ज्यादा से ज्यादा दिन तक जबरन जेल में बंद रखना चाहती है इसलिए उसके जमानतगीरों की सत्यापन रिपोर्ट भेजने में आनाकानी कर रही है। यह आरोप खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने नौबस्ता व पनकी थाने की पुलिस पर लगाया है।

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शिवाकांत का कहना है कि 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से खुशी को जमानत मिल गई थी। जमानत आदेश सेशन कोर्ट में दाखिल करने के बाद 6 जनवरी को कोर्ट ने खुशी को डेढ़-डेढ़ लाख की दो जमानतें दाखिल करने पर रिहा करने के आदेश दिए थे। 9 जनवरी को खुशी के पिता श्यामलाल तिवारी और बहन नेहा शुक्ला की ओर से दो जमानतें कोर्ट में दाखिल कर दी गई थीं। वहीं किशोर न्याय बोर्ड में भी खुशी के भाई पूर्णेश तिवारी व बहन नेहा शुक्ला की ओर से 35-35 हजार की दो जमानतें दाखिल की गई थीं।

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खुशी के पिता व भाई पनकी थानान्तर्गत निवास करते हैं जबकि बहन का पता नौबस्ता थानान्तर्गत आता है। जमानतों के सत्यापन के लिए कोर्ट ने नौबस्ता व पनकी थाने से रिपोर्ट मांगी है। दोनों ही थानों में जमानतों के कागजात रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए थे। डाक विभाग की ऑनलाइन ट्रैक रिपोर्ट बता रही है कि कागजात 11 जनवरी को ही दोनों थानों में पहुंच गए हैं लेकिन अब तक कोई भी पुलिसकर्मी खुशी के परिजनों के घर सत्यापन करने नहीं पहुंचा। खुशी के परिजन थाने जा रहे हैं तो उन्हें डाक न मिलने की बात कहकर टरकाया जा रहा है।
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