बिकरू कांड में आरोपी खुशी दुबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के दस दिन बाद भी खुशी की जेल से रिहाई नहीं हो सकी है। खुशी को पुलिस ज्यादा से ज्यादा दिन तक जबरन जेल में बंद रखना चाहती है इसलिए उसके जमानतगीरों की सत्यापन रिपोर्ट भेजने में आनाकानी कर रही है। यह आरोप खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने नौबस्ता व पनकी थाने की पुलिस पर लगाया है।
शिवाकांत का कहना है कि 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से खुशी को जमानत मिल गई थी। जमानत आदेश सेशन कोर्ट में दाखिल करने के बाद 6 जनवरी को कोर्ट ने खुशी को डेढ़-डेढ़ लाख की दो जमानतें दाखिल करने पर रिहा करने के आदेश दिए थे। 9 जनवरी को खुशी के पिता श्यामलाल तिवारी और बहन नेहा शुक्ला की ओर से दो जमानतें कोर्ट में दाखिल कर दी गई थीं। वहीं किशोर न्याय बोर्ड में भी खुशी के भाई पूर्णेश तिवारी व बहन नेहा शुक्ला की ओर से 35-35 हजार की दो जमानतें दाखिल की गई थीं।