डीएम कौशलराज शर्मा और एसीएम प्रथम योगेंद्र कुमार के निरीक्षण में बीआईसी की जमीन पर आईपीएस सुनील सक्सेना और राघवेंद्र अवस्थी समेत कई लोगों के अवैध कब्जे मिले।
आवासों में रहने वाले लोगों की सूची भी बीआईसी के अफसर नहीं दिखा सके। नीलामी में 27 संपत्तियां खरीदने वालों में डीएम बंगले के सामने की जमीन, खलासी लाइन स्थित बंगले पर एमेजॉन समेत अन्य सात संपत्तियों पर कब्जा भी दे दिया गया है।
बीआईसी ने 35 संपत्तियों को सरप्लस घोषित कर 27 संपत्तियों की नीलामी कर निजी व्यक्तियों को बेच दी थी। ये सभी संपत्तियां नजूल की हैं और बीआईसी को पट्टे पर दी गई थी। इन्हें बेचने से राज्य सरकार को नुकसान हुआ है। इसकी जांच कमिश्नर मो. इफ्तेखारुद्दीन ने कमेटी बनाकर डीएम और एसीएम को दी है। दोनों अफसरों ने शनिवार को बीआईसी की संपत्तियों की हकीकत जानने के लिए स्थलीय निरीक्षण किया।
सबसे पहले डीएम मर्चेंट चेंबर चौराहे से आगे बने टूटे बंगले में पहुंचे। यहां बने बीआईसी के बंगलों में रहने वाले लोगों की सूची तक बीआईसी अफसरों के पास नहीं थी। रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवार भी बंगलों में रह रहे थे। डीएम ने इन्हें हटाने को कहा। बाद में अफसरों ने मैकरावर्टगंज, चुन्नीगंज में बंगलों की जमीन देखी। डीएम ने बताया कि दो आईपीएस के परिवारों समेत अन्य लोग अवैध रूप से काबिज मिले।
दोनों आईपीएस अधिकारी इन बंगलों में किस आधार पर रह रहे हैं, इसका जवाब न तो बीआईसी अफसरों के पास था और नहीं परिवारों के पास कोई कागज हैं। सभी अवैध कब्जेदारों को नोटिस देकर बंगले खाली कराने को कहा है। नीलामी की प्रक्रिया और अन्य अभिलेख मांगे गए हैं। डिजिटल नक्शा बनाकर नजूल और बीआईसी की जमीन के बारे में जानकारी मांगी है। अवैध रूप से रह रहे लोगों की सूची भी तैयार करने को कहा है।