कानपुर देहात। एंटी डकैती कोर्ट में बेहमई कांड की सुनवाई चल रही है। मंगलवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने वादी मुकदमा व अन्य गवाहों के बयानों को लेकर बहस की।
कोर्ट में तर्क रखा कि वादी ने एफआईआर में श्यामबाबू व पोसा का नाम नहीं लिया। शिनाख्त कार्रवाई भी विलंब से हुई। पुलिस ने घटना में मारे गए दो व्यक्तियों के शवों का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया था। मामले में कोर्ट ने बहस के लिए अगली तारीख दो अगस्त तय की है।
बेहमई गांव में फूलन देवी ने 14 फरवरी 1981 को साथियों के साथ मिलकर 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मामले में गांव के राजा राम सिंह ने फूलन देवी व अन्य डकैतों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान घटना के वादी, गवाह समेत अधिकांश आरोपियों की मौत हो चुकी है। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट चंद्रमणि मिश्रा की अदालत में चल रही है।
मंगलवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता रघुनंदन सिंह ने बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि मामले के वादी राजाराम ने श्यामबाबू व पोसा की नामजदगी एफआईआर में नहीं की है, जबकि अपने बयान में उसने कहा है कि वह पोसा को घटना के पहले से जानता था।
वहीं, घटना में घायल हुए गवाह वकील सिंह ने पोसा व श्यामबाबू का नाम लिया है, लेकिन शिनाख्त करने जेल नहीं गया। गवाह जंटर सिंह से पुलिस ने छह माह बाद शिनाख्त करवाई, जबकि 30 से 45 दिन में शिनाख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अभियोजन के गवाह करण सिंह समेत कई गवाहों ने श्यामबाबू व पोसा का नाम अपने बयानों में नहीं लिया है। साथ ही घटना में मारे गए दो व्यक्तियों के शवों का पोस्टमार्टम पुलिस ने नहीं कराया था। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे ने बताया कि उनकी बहस होनी बाकी है।
कोर्ट ने बहस के लिए दो अगस्त की तिथि तय की है। इस दौरान विश्वनाथ व श्यामबाबू कोर्ट में उपस्थित रहे। आरोपी पोसा जेल में बंद हैं। अत्यधिक वृद्ध व बीमार होने के कारण उसे कोर्ट नहीं लाया जा रहा है।