फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बांदा: किशोरी की हत्या में सौतेली मां को उम्रकैद, 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया

Fri, 10 Dec 2021 09:08 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

दोनों पक्षों की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) बलराज सिंह ने ममता को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद होगी।
 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांदा जिले में 17 वर्षीय पुत्री की हत्या में दोषी सौतेली मां अब ताउम्र जेल में रहेगी। अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत से यह फैसला करीब नौ वर्ष बाद आया। दोषी महिला तब से जेल में ही है।
विज्ञापन


शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कालोनी में किराये के कमरे में ममता वर्मा रहती थी। उसने मुन्नालाल वर्मा से दूसरी शादी की थी। शादी के कुछ दिन बाद मुन्नालाल की हत्या हो गई। मुन्नालाल की पहली पत्नी मंजू वर्मा से बेटी हुई थी।

मुन्नालाल की हत्या के बाद ममता वर्मा और बेटी नेहा साथ रह रही थीं। 3 जनवरी 2013 की रात नेहा की पीटकर हत्या करने के बाद अपने दो पुरुष सहयोगियों की मदद से ममता ने शव पैलानी में पुल से नीचे केन नदी में फेंक दिया। नेहा के जालौन निवासी ताऊ (मुन्नालाल के बड़े भाई) वाल्मीकि वर्मा ममता और उसके मिलने वाले अवर अभियंता राम प्रसाद कुशवाहा निवासी लखनऊ के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई।
विज्ञापन


विवेचना में पुलिस ने नेहा का शव अपने वाहन में ले जाने वाले चालक कुलदीप को भी आरोप पत्र में शामिल किया। तीनों जेल चले गए। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी जावित्री प्रसाद विश्वकर्मा ने 10 गवाह पेश किए।
विज्ञापन

दोनों पक्षों की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) बलराज सिंह ने ममता को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद होगी।

धारा-201 में तीन वर्ष की कैद और तीन हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना न देने पर छह माह और जेल की सजा सुनाई। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। अवर अभियंता राम प्रसाद को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। तीसरे आरोपी कुलदीप सिंह की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई। रिहा हुए अवर अभियंता की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रजराज सिंह परिहार ने की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें