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अमृत महोत्सव: डीएवी हॉस्टल में बुना गया था काकोरी कांड का तानाबाना, चार छात्रों को भेजा गया था जेल

Thu, 04 Aug 2022 02:41 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

1942 की अगस्त क्रांति में भी डीएवी के छात्रों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था, छात्रों ने जनता में पर्चे बांट आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया था। संगठित छात्रों की एक गुप्त कमेटी थी, जिसमें रमेश निगम, गोविंद नारायण शुक्ल और मुन्ना लाल सक्सेना आदि शामिल थे।
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डीएवी हॉस्टल, डॉ. समर बहादुर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजादी के अमृत महोत्सव पर क्रांतिकारियों के पनाहगाह डीएवी कॉलेज और हॉस्टल का योगदान कैसे भुलाया जा सकता है। नौ अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड की योजना डीएवी हॉस्टल में ही क्रांतिकारियों ने यहां के छात्र शिव वर्मा के कमरे में बनाई गई थी। इस दौरान चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह भी यहीं मौजूद थे। काकोरी कांड के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने डीएवी कॉलेज के कई छात्रों को गिरफ्तार किया था जिसमें शिव वर्मा भी थे।

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दयानंद एंग्लोवैदिक (डीएवी) कॉलेज के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. समर बहादुर सिंह ने बताया कि डीएवी हॉस्टल में रहने वाले छात्र शिव वर्मा के कमरे में क्रांतिकारी आकर रुकते थे। काकोरी कांड से दस दिन पहले चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लाहिणी, मन्मथ नाथ गुप्ता, शचींद्र नाथ सान्याल समेत कई क्रांतिकारियों ने हॉस्टल में ही काकोरी में ट्रेन लूटने की योजना बनाई थी। इसके बाद ही काकोरी कांड को अंजाम दिया गया था। कांड के बाद डीए वी कॉलेज के चार छात्र शिव वर्मा, सुरेंद्र पांडेय, जयदेव कपूर और महादेव सिंह के खिलाफ मुकदमा भी चला। महादेव सिंह को काला पानी की सजा भी दी गई थी।

छात्रों का समूह बना था क्रांतिकारी 
डीएवी के सालिग्राम शुक्ला, डॉ. गया प्रसाद, जयदेव कपूर, विजय कुमार सिंहा, सुरेंद्र पांडेय, जयदेव सिंह और महावीर सिंह समेत कई छात्र क्रांतिकारियों के दल में शामिल हुए थे। क्रांतिकारी आजादी की लड़ाई के लिए हॉस्टल में ही बम बनाते थे और हथियारों को रखा जाता था। कई बड़े क्रांतिकारी छात्र बनकर यहां रुकते थे।

1942 की क्रांति में भी डीएवी के छात्र रहे आगे
1942 की अगस्त क्रांति में भी डीएवी के छात्रों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था, छात्रों ने जनता में पर्चे बांट आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया था। संगठित छात्रों की एक गुप्त कमेटी थी, जिसमें रमेश निगम, गोविंद नारायण शुक्ल और मुन्ना लाल सक्सेना आदि शामिल थे। ये तीनों छात्रों को गिरफ्तार भी किया गया था।
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कॉलेज के शिक्षक करते थे मार्गदर्शन
डीएवी कॉलेज और हॉस्टल में क्रांतिकारी यूं ही नहीं आते थे। यहां के शिक्षक मुंशीराम शर्मा (सोम) समेत कई शिक्षक उनका मार्गदर्शन करते थे। चंद्रशेखर आजाद और सालिग्राम शुक्ला तो मुंशीराम शर्मा के निजी निवास का उपयोग भी नीतियां बनाने के लिए किया करते थे।

डीएवी ने दिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री
1919 में स्थापित हुए डीएवी कॉलेज में कई चर्चित हस्तियों ने भी पढ़ाई की है। पूर्व प्राचार्य और भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अटल बिहारी बाजपेई (पूर्व प्रधानमंत्री), रामनाथ कोविंद (पूर्व राष्ट्रपति), कन्हैया लाल नंदन, महिप सिंह (दोनों साहित्यकार) और गोपाल दास नीरज (कवि) समेत कई चर्चित हस्तियों ने यहां से पढ़ाई की है।

कॉलेज का देश की आजादी में अमूल्य योगदान रहा है, यहां के कई छात्रों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। हमें अपने उन छात्रों पर गर्व है, जिन्होंने आजादी के लड़ाकों में अपना नाम दर्ज कराकर, कॉलेज का मान बढ़ाया। - डॉ. अरुण कुमार दीक्षित, प्राचार्य डीएवी कॉलेज

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