उन्होंने अदालत में कहा था कि संतोष शुक्ला की हत्या करते उन्होंने विकास दुबे को नहीं देखा, जिसके बाद सुबूतों के अभाव में 2005 में अदालत ने विकास दुबे को दोषमुक्त करार दिया था। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में विकास दुबे का नाम चर्चा में आ गया था। डीटू गैंग के सरगना रफीक की भी पुलिस अभिरक्षा में दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या की गई थी।
दरअसल वर्ष 2004 में हरबंश मोहाल के हीर पैलेस टॉकिज के पास डीटू गैंग और एफटीएफ के बीच हुई मुठभेड़ हो गई थी। इस दौरान एसटीएफ के एक सिपाही धर्मेंद्र सिंह चौहान शहीद हो गए थे। एसटीएफ की जवाबी कार्रवाई में डीटू गैंग के दो सदस्य समीम उर्फ दुरग्गा और जमशेद उर्फ भइया को मार गिराया था।
वारदात में एके 47 का प्रयोग किया गया था। मामले में डीटू गैंग का सरगना रफीक वांटेड था। करीब नौ माह बाद पुलिस ने रफीक को कोलकाता से दबोच लिया था। इसके बाद उसे रिमांड पर शहर लाया गया था। यहां कोर्ट के आदेश पर उसे एके 47 की बरामदगी के लिए जूही यार्ड के पास ले जाया गया, यहां पर रफीक पर पुलिस अभिरक्षा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने वारदात के पीछे गैंग वॉर बताई थी। मामले में डी 34 गैंग का सरगना परेवज, बहार खान व गुलाम को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने परवेज को एनकाउंटर में मार गिराया था। गुलाम की मौत गैंगवॉर में हो गई थी। 2019 में बहार खान को उम्र कैद की सजा दे दी गई थी। इसी तरह 26 अक्तूबर 2021 को चौबेपुर के पनऊपुरवा में चुनावी रंजिश में पुलिस की मौजूदगी में किसान आनंद कुमार कुरील की हत्या की गई थी। दो दरोगा समेत 20 पर एफआईआर दर्ज हुई थी।