दीवारों पर नहीं दिल पर लग रहे हथौड़े
1995 में मसूद कॉम्प्लेक्स में दुकान खरीदकर परिवार के साथ काम शुरू करने वाले खेमचंद दुसेजा कहते हैं कि ये हथौड़े दीवारों पर नहीं दिल पर लग रहे हैं। पहले दुकानों के मालिक थे, अब अब किराये पर काम कर रहे हैं। मसूद और एआर टॉवर में उनकी आठ दुकानें थीं।
नई इमारत बनेगी और फिर से शुरू होगा काम
अब उम्मीद है कि नई इमारत बनेगी और फिर से अपनी दुकानों में काम शुरू करेंगे। खेमचंद बताते हैं कि रेडीमेड, होजरी कपड़ों का बाजार तलाशने के लिए अटैची में सैंपल कपड़े लेकर चेन्नई, हैदराबाद, गुवाहाटी, ओडिशा तक जाते थे। दो लाख की पूंजी से कारोबार की शुरुआत की थी।
एक-एक सीढ़ी चढ़कर आगे बढ़े थे। एआर टॉवर में चार दुकानें अग्निकांड में जल गईं। तीन पीढ़ी एक साथ कारोबार संभाल रहीं थीं। अब कारोबार चलता रहे, इसलिए किराये पर दुकानें लेकर व्यापार कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह खराब दौर भी जल्द निकल जाएगा। -दिलीप दुसेजा, अध्यक्ष, एआर टॉवर मर्चेंट एसोसिएशन
2006 में मसूद में किराये पर दुकान लेकर काम शुरू किया था। काम चलने लगा तो 2009 में दुकान खरीद ली। इसके बांद नवंबर 2022 में एक और दुकान खरीद ली। बेटे के साथ कारोबार देख रहे थे। कर्जा लेकर कभी काम शुरू किया था। अब फिर से जीरो से शुरूआत की जा रही है। -भूपेंद्र सिंह, महामंत्री, मसूद कॉम्प्लेक्स मर्चेंट एसोसिएशन
बढ़ता गया कारोबार
मसूद कॉम्प्लेक्स में 160 दुकानें हैं। मौजूदा समय में इसका टर्नओवर करीब दो सौ करोड़ के करीब है। शुरुआत में 10-20 लाख का टर्नओवर हुआ करता था। इसके अलावा साल 2000 में बने एआर टॉवर में 108 दुकानें हैं। यहां की दुकानों का टर्नओवर पांच से सात लाख रुपये था। अब सौ करोड़ के करीब है।