महिलाओं में क्रिकेट के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत बुधवार को ग्रीनपार्क स्टेडियम में महिला टी-20 मैत्री मैच आयोजित किया गया। अपराजिता ए टीम ने बी को आठ विकेट से हराकर विजेता ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।
दोनों टीमों में पुलिस और प्रशासनिक महिला अफसरों के साथ तकनीकी के क्षेत्र में सेवारत महिलाएं, चिकित्सक और प्रोफेसर थीं। आला और पिस्टल वाले हाथों में बैट-बॉल देखकर सभी लोग चकित रह गए। प्रोफेशनल क्रिकेटर न होने के बावजूद इन अफसरों ने अपनी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग से सभी को प्रभावित किया।
अपराजिता ए टीम की कप्तान अलका सिंह ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला लिया। अपराजिता बी टीम ने 15 ओवर में सात विकेट खोकर 89 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ए टीम ने 12.4 ओवर में दो विकेट खोकर 90 रन बनाकर मैच जीत लिया। मैन ऑफ द मैच ए टीम की ममता उपाध्याय, सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बी टीम की पूनम गुप्ता और ए टीम की डॉ. प्रीति पांडेय सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज चुनी गईं।
कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने विजेता व उप विजेता टीम को ट्रॉफी देकर पुरस्कृत किया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के नोडल ऑफिसर मनोज मल्होत्रा, अनूप जैन, अश्वनी कोहली, आलोक गुप्ता, दिनेश कटियार आदि लोग मौजूद रहे।
टीम ए
उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन की चयनकर्ता अलका सिंह (कप्तान), सहायक आयुक्त सेल्स टैक्स ममता उपाध्याय, महिला कल्याण अधिकारी मोनिका यादव, एडिशनल एसपी निहारिका शर्मा, अवर अभियंता जलकल पूनम गुप्ता, भावना द्विवेदी, लोको हॉस्पिटल की सीएमएस डॉ. रेखा यादव, एसएन सेन पीजी कॉलेज की शिक्षिका डॉ. प्रीति पांडेय, आरपीएफ इंस्पेक्टर शिप्रा, जिला समन्वयक महिला शक्ति शैल शुक्ला, होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. आरती मोहन।
टीम बी
खिलाड़ी मोनिका (कप्तान), स्नेहा सिंह, अवर अभियंता नगर निगम शिल्पी सिंह, एसडीओ केस्को उमा गुप्ता, एडीएमओ डॉ. उर्वशी यादव, डीएवी कॉलेज की शिक्षिका डॉ. अनुपमा सिंह, एआईटीएच की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता दीक्षित और कल्पना कटियार, आरपीएफ इंस्पेक्टर सुरुचि, सीएसए की प्रोफेसर डॉ. रितु पांडेय, सहायक जिला रोजगार अधिकारी इशिता जैन।
मैच में इन खिलाड़ियों ने किया सहयोग
बबिता यादव, गरिमा, निकिता, सोती, कशिश, सौम्या कटियार और शशि
किसने क्या कहा...
काफी अच्छा अनुभव रहा। न जाने कितने सालों के बाद हाथ में बल्ला थामा है। अभी तक इस ग्राउंड में मैच के दौरान ड्यूटी ही की है, पहली बार यहां खेलने का मौका मिला।
-निहारिका शर्मा
स्कूल में या कभी बच्चों के साथ प्लास्टिक की गेंद से खेला था। आज 10-12 साल बाद लेदर की बॉल से खेलकर आनंद आ गया। पहले मन में था कैसे खेलेंगे, लेकिन यह बेहतरीन अनुभवों में से एक रहा।
-ममता उपाध्याय
पहले यूपीसीए और अब उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन की सेलेक्टर हूं, लेकिन 15 साल बाद मैदान पर उतरी। ग्रीनपार्क में लंबे समय बाद खेलने का मौका मिला।
-अलका सिंह
25 साल के बाद क्रिकेट किट को हाथ लगाया है। अभी तक बच्चों को ही खेलते देखती थी। ग्रीनपार्क के सामने कॉलेज है लेकिन इस ग्राउंड में आकर खेलने में 25 सालों का समय लग गया।
-डॉ. अनुपमा सिंह
काफी अलग अनुभव रहा। कई कार्यक्रमों में इससे पहले शामिल हुई हूं, लेकिन किक्रेट खेलकर आनंद आ गया। बैट और बॉल देखकर पहले तो नर्वस थी, लेकिन जैसे मैदान में उतरने के बाद डर खत्म हो गया।
-शिप्रा
मैंने तो 20 साल के बाद क्रिकेट बैट उठाया होगा। घर-परिवार और नौकरी की भागदौड़ में यह सब छूट गया था। आज खेलकर बचपन याद आ गया।
-उमा गुप्ता
अमर उजाला ने काफी अच्छी पहल की। क्रिकेट हमेशा लड़कों का खेल ही माना जाता रहा है, लेकिन महिलाओं के बीच मैच होता देख काफी उत्साह रहा।
-डॉ. रेखा यादव
महिलाओं के कई कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हूं, लेकिन इंटरनेशनल ग्राउंड में पूरी किट और लेदर बॉल के साथ मैच खेलने का आनंद ही कुछ और रहा।
-डॉ. उर्वशी यादव
मैंने तीस साल बाद बैट पकड़ा था। मैदान में उतरकर पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं। इंटरनेशनल ग्राउंड पर मैच खेलना यादगार रहेगा। अमर उजाला को इसके लिए धन्यवाद।
- डॉ. रितु पांडेय