सिख विरोधी दंगों के केसों की विवेचना करने और दंगाइयों को बेनकाब करने में रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट सबसे कारगर साबित हुई है। रिपोर्ट से मिले 135 शपथ पत्रों में एक-एक जानकारी दर्ज मिली। ये जानकारी 37 साल पहले दंगों के बाद पीड़ित परिवारों व गवाहों ने शपथ पत्र के जरिये आयोग दी थी।
इसमें दंगाइयों के नाम भी लिखे हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी की हत्या के बाद 1984 में कानपुर में दंगे हुए थे, जिसमें 127 लोगों की हत्या कर दी गई थी। एसआईटी 11 केसों की विवेचना लगभग पूरी कर चुकी है। एसआईटी के डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि दंगों के बाद रंगनाथ मिश्र आयोग का गठन हुआ था।
आयोग ने दंगों की जांच की थी। इसलिए एसआईटी ने जब जांच शुरू की तो गृह मंत्रालय की अनुमति से आयोग की रिपोर्ट को जांच में शामिल किया गया। रिपोर्ट में कुल 657 शपथ पत्र थे। दंगा पीड़ितों ने जांच के दौरान बयान दिए थे। इसमें एसआईटी की जांच से संबंधित 135 शपथ पत्र मिले। डीआईजी के मुताबिक इससेे विवेचना बहुत आसान हो गई।