कानपुर देहात। जिले में सोमवार को एंबुलेंस का चक्का जाम रहा। कर्मचारियों ने मांगों को लेकर जिला अस्पताल में एंबुलेंस खड़ी कर हड़ताल की। इससे गंभीर मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला अस्पताल सहित क्षेत्र के चिकित्सालयों से रेफर गंभीर मरीजों को तीमारदार टेंपो, ई रिक्शा व प्राइवेट वाहनों से ले जाने को मजबूर हुए।
जिले में कर्मचारियों ने सोमवार को एंबुलेंस का चक्का जाम कर वाहन को जिला अस्पताल परिसर में खड़ा कर दिया। इसके बाद ओपीडी भवन के बाहर धरना देने लगे। इस दौरान प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल पहुंचे राजेंद्र को परेशान होना पड़ा।, जहां से उन्हें कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया। प्राइवेट वाहन चालक ने उनसे करीब दो हजार रुपये वसूले।
इसी प्रकार झींझक लोहिया नगर की वंदना को उल्टी दस्त की शिकायत पर भाई राहुल सीएचसी झींझक लेकर पहुचा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। राहुल ने बताया कि उसने एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं लिा। इस पर प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल आया, इस दौरान वाहन चालक ने छह सौ रुपये वसूले।
वहीं रसूलाबाद के द्विवलाखन पुरवा गांव की विजय कुमारी को सुबह सीने में अचानक दर्द होने लगा। एंबुलेंस न मिलने पर उसने प्राइवेट वाहन किया। इसके बाद सीएचसी पहुंची। वहां उसका उपचार किया गया।
परिजनों ने बताया कि वाहन चालक ने अस्पताल पहुंचाने के तीन सौ रुपये ले लिए। इसी प्रकार डेरापुर, हवासपुर, सिकंदरा, राजपुर आदि अस्पतालों में तीमारदार एंबुलेंस के लिए परेशान रहे। उन्हें प्राइवेट वाहन से ही मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ा। देर रात तक हड़ताल जारी रहने से लोगों को परेशान होना पड़ा।
एसडीएम व सीएमओ से वार्ता विफल
हड़ताल की जानकारी के बाद एसडीएम सदर राजीव राज सहित सीएमओ डॉ. एके सिंह वार्ता करने पहुंचे। हड़ताल प्रदेश व्यापी होने की वजह से कर्मियों ने प्रदेश पदाधिकारियों के निर्देश पर ही हड़ताल खत्म करने की बात कही। कई बार अफसरों ने कर्मियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता विफल रही। (संवाद)
एडीजे को कानपुर छोड़ने गई एंबुलेंस
एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल की वजह से मरीज व तीमारदारों को खासा परेशान होना पड़ा। जानकारी के बाद भी कर्मी हड़ताल की बात कहकर मरीजों को अस्पताल छोड़ने नहीं गए। वहीं दोपहर बाद एडीजे सुनील कुमार यादव का पैर टूट गया। चालक गोपाल शर्मा व ईएमटी नागेंद्र सिंह ने बताया कि सूचना के बाद एंबुलेंस लेकर पहुंचे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। रेफर होने के बाद उन्हें कानपुर तक छोड़ने गए। (संवाद)
इमरजेंसी के लिए चलती रहीं पांच एंबुलेंस
जिले में कुल 55 एंबुलेंस संचालित है। सोमवार सुबह हड़ताल के चलते सभी कर्मी एंबुलेंस लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और वहां हड़ताल शुरू कर दी। एंबुलेंस प्रभारी आदित्य सक्सेना ने बताया कि चालकों से इमरजेंसी सेवा के लिए पांच एंबुलेंस चलाने का निवेदन किया गया।
इसके बाद जिले में पचास एंबुलेंस के कर्मी हड़ताल पर रहे, जबकि पांच एंबुलेंस इमरजेंसी मरीजों को अस्पताल पहुंचाती रहीं। उन्होंने बताया कि मवई मुक्ता डेरापुर में एक मार्ग दुर्घटना में घायल चार लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। (संवाद)
स्वास्थ्य कर्मियों ने किया विरोध प्रदर्शन
राजपुर। गैर जनपद स्थानांतरण प्रक्रिया पर पिछले साल कोरोना काल में रोक लगाई गई थी। इसके अलावा स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों की वेतन पॉलिसी न होने, एक समान पद और समान योग्यता के बावजूद संविदा कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ाने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
मंगलवार को जिला स्तर सहित राजपुर पीएचसी में कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर हड़ताल की। इस दौरान डॉ. पीके अग्निहोत्री, डॉ. शिव विनायक त्रिपाठी, प्रतिपालेंद्र सिंह, रामसिंह, प्रदीप तोमर, मनीष कुमार मौजूद रहे। (संवाद)
जान गवाने के बाद भी नहीं मिला बीमा का लाभ
एंबुलेंस संगठन के जिला अध्यक्ष प्रवीण ने बताया कि कोरोना कॉल में जान गवाने वाले कर्मियों को शासन स्तर से अभी तक पचास लाख के बीमा का लाभ नहीं दिया गया। साथ ही कर्मियों को नियमित नहीं किया गया। उन्होंने मांग उठाई की कर्मियों को ठेका पद्धति से हटाकर नियमित किया जाए। इस बाबत हर माह छह सूत्री ज्ञापन शासन को भेजा जा रहा है। (संवाद)